Ayushman Bharat Yojana: आयुष्मान भारत योजना से करोड़ों लोगों को मिला संबल, सार्वजनिक स्वास्थ्य में ऐतिहासिक बदलाव
नई दिल्ली, 28 जनवरी। बजट सत्र की शुरुआत पर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों और सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की प्रतिबद्धता को दोहराया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और कल्याण मानव पूंजी के विकास की नींव है और समावेशी राष्ट्रीय प्रगति के लिए सभी नागरिकों को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राष्ट्रपति ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना देश के गरीब और कमजोर वर्गों के लिए वरदान साबित हो रही है। पिछले एक वर्ष में इस योजना के तहत 2.5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 11 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया गया। इस योजना ने माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तक उन लोगों की पहुंच सुनिश्चित की है, जो पहले महंगे इलाज के कारण वंचित रह जाते थे। इससे न केवल करोड़ों परिवारों को आर्थिक राहत मिली है, बल्कि समय पर उपचार के कारण जीवन रक्षा भी संभव हो सकी है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई आयुष्मान वय वंदना योजना का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि अब तक लगभग एक करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से करीब 8 लाख बुजुर्गों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला है। यह योजना बुजुर्गों के सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से देशभर में 1.80 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए जा रहे हैं। ये केंद्र ग्रामीण, दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों में अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। यहां मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की जांच, मुफ्त दवाइयां और परामर्श जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
राष्ट्रपति ने मिशन मोड में संचालित राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि अब तक 6.5 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिससे समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार संभव हो पाया है। इसके साथ ही जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है, जिससे कई राज्यों में मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
पूर्वोत्तर राज्यों में स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा नए मेडिकल कॉलेज, कैंसर संस्थान और महिला एवं बाल अस्पताल स्थापित किए जा रहे हैं। इससे क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और स्थानीय आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष जोर देते हुए राष्ट्रपति ने ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान का उल्लेख किया, जिसके तहत अब तक 7 करोड़ महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। इससे महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को भी बल मिला है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह भी बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत को ट्रेकोमा मुक्त देश घोषित किया है। यह उपलब्धि भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है और यह दर्शाती है कि निरंतर प्रयासों और मजबूत स्वास्थ्य नीतियों के जरिए बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
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