Army Operational Readiness: सेना प्रमुख ने सप्त शक्ति कमान की तैयारियों की समीक्षा की, तकनीक आधारित युद्धक क्षमता बढ़ाने पर जोर
नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने गुरुवार को जयपुर स्थित सप्त शक्ति कमान मुख्यालय का दौरा कर सेना की ऑपरेशनल तैयारियों और युद्धक क्षमताओं की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों, सैन्य प्रशिक्षण, मिशन रेडीनेस और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी ली।
सप्त शक्ति कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा ने सेना प्रमुख को कमान की वर्तमान ऑपरेशनल स्थिति और तैयारियों के बारे में जानकारी दी। इसके साथ ही सैनिकों के प्रशिक्षण और विभिन्न परिस्थितियों में तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों से भी अवगत कराया गया।
सेना प्रमुख ने भारतीय सेना को भविष्य के युद्ध के लिए अधिक आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने ‘विजय’ के तहत सेना की क्षमताओं को नई तकनीकों के अनुरूप विकसित करने और बदलते युद्धक्षेत्र में तकनीकी बढ़त बनाए रखने की आवश्यकता बताई।
जनरल सेठ ने कहा कि आधुनिक युद्ध के स्वरूप में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे में उभरती तकनीकों को सैन्य प्रशिक्षण और ऑपरेशनल तैयारियों में शामिल करना महत्वपूर्ण है। नई तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल से सैनिकों की क्षमता बढ़ाने के साथ युद्धक्षेत्र में निर्णायक बढ़त बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
समीक्षा के दौरान सेना प्रमुख ने सप्त शक्ति कमान के अधिकारियों और जवानों की सतर्कता, पेशेवर दक्षता और मिशन के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने सैन्य तैयारियों को लगातार मजबूत बनाए रखने और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षण को विकसित करने पर जोर दिया।
जयपुर दौरे के दौरान जनरल सेठ ने राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से भी मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ बातचीत की। इन मुलाकातों में सेना और नागरिक प्रशासन के बीच सहयोग को और मजबूत करने सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
सिविल-मिलिट्री सहयोग को आपदा प्रबंधन, सुरक्षा और अन्य परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जाता है। सेना प्रमुख के दौरे के दौरान इस समन्वय को और प्रभावी बनाने पर भी चर्चा की गई।
सप्त शक्ति कमान की समीक्षा के जरिए सेना प्रमुख ने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए ऑपरेशनल रेडीनेस, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। भारतीय सेना का फोकस सैनिकों को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने और तकनीकी क्षमताओं को लगातार मजबूत करने पर है।


