Allahabad High Court: गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नर तलब, कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर जताई नाराजगी
नोएडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र से जुड़े एक मुकदमे के जमानत मामले में गौतमबुद्धनगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने जांच अधिकारी द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश का पालन नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए गौतमबुद्धनगर के पुलिस कमिश्नर को 24 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। पुलिस कमिश्नर को अदालत के सामने यह भी स्पष्ट करना होगा कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए उनकी ओर से अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
मामला क्रिमिनल मिसलेनियस बेल एप्लीकेशन नंबर 23856/2026 से संबंधित है। जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 14 जुलाई को राज्य पक्ष को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने मामले की जांच के दौरान एकत्र की गई सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी स्पष्ट जानकारी मांगी थी।
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से यह बताने का निर्देश दिया था कि जांच के दौरान पुलिस द्वारा जुटाई गई सीसीटीवी फुटेज में जमानत मांग रहे आरोपी की पहचान हुई है या नहीं। इसके बावजूद निर्धारित अवधि के भीतर राज्य की ओर से आवश्यक जवाब दाखिल नहीं किए जाने का मामला सामने आया।
एडवोकेट अमित भाटी बोड़ाकी के अनुसार, अदालत ने मामले की गंभीर स्थिति को देखते हुए जवाब तलब किया है। उन्होंने बताया कि मामले में दाखिल आरोप पत्र के साथ मौजूद सीसीटीवी फुटेज में मुख्य अभियुक्त अमरपाल उर्फ छोटे की पहचान हो पाई है। वहीं, दो अन्य अभियुक्तों की पहचान सीसीटीवी फुटेज स्पष्ट नहीं होने के कारण नहीं हो सकी।
19 अगस्त को मामले की दोबारा सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने पाया कि तीन सप्ताह में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद निर्धारित समय के भीतर राज्य की तरफ से जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने इसे अपने आदेश के अनुपालन में लापरवाही के रूप में लिया।
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति समीर जैन ने पुलिस अधिकारियों द्वारा अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। इसके बाद कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को दोपहर दो बजे होगी। इसी दिन गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नर को हाईकोर्ट के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। अदालत ने उनसे जांच अधिकारी द्वारा पूर्व आदेश का पालन नहीं किए जाने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।
इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर को यह जानकारी भी देनी होगी कि हाईकोर्ट के 14 जुलाई के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए उनके स्तर से क्या कार्रवाई की गई और निर्धारित अवधि में राज्य पक्ष की ओर से आवश्यक जवाब दाखिल क्यों नहीं हो सका।
यह मामला अब 24 अगस्त की सुनवाई के कारण महत्वपूर्ण हो गया है। इस दौरान पुलिस कमिश्नर की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ अदालत के पूर्व निर्देशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। मामले में आगे क्या आदेश दिया जाएगा, यह अगली सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।


