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Akshaya Tritiya Shahdara: भगवान आदिनाथ के आहार उत्सव पर जैन समाज का भव्य आयोजन

Akshaya Tritiya Shahdara: भगवान आदिनाथ के आहार उत्सव पर जैन समाज का भव्य आयोजन

रिपोर्ट: रवि डालमिया

दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर जैन समाज की आस्था और श्रद्धा का विराट संगम देखने को मिला। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी के आहार प्रसंग को अत्यंत भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ स्मरण किया गया। मान्यता है कि इसी दिन भगवान आदिनाथ ने दीर्घ उपवास के बाद आहार ग्रहण किया था, इसलिए यह दिन जैन समाज के लिए विशेष महत्व रखता है।

इस पावन अवसर पर शाहदरा के विभिन्न जैन मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पूजन-अर्चना, अभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का भव्य आयोजन किया गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा क्षेत्र भक्ति व आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।

शाहदरा जिले के शांति मोहल्ला कपड़ा मार्केट में विशेष सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां समाजसेवी देवेंद्र जैन (कालू) द्वारा श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के लिए गन्ने के रस का वितरण किया गया। इस सेवा कार्य में बड़ी संख्या में व्यापारी वर्ग, स्थानीय लोग और श्रद्धालु शामिल हुए और प्रसाद स्वरूप गन्ने का रस ग्रहण किया। पूरे दिन बाजार क्षेत्र में भीड़ बनी रही और लोगों ने इस पहल को सराहनीय बताया।

इस आयोजन को सफल बनाने में देवेंद्र जैन (कालू) की अहम भूमिका रही, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जनपद के मंसूरपुर के निवासी हैं और वर्तमान में शाहदरा में व्यवसाय कर रहे हैं। उनके साथ समाजसेवी पारस जैन ने भी सक्रिय सहयोग दिया, जिससे कार्यक्रम सुव्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न हुआ।

इसके अलावा, शाहदरा के विभिन्न जैन मंदिरों में भी विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां कहीं भजन-कीर्तन की गूंज सुनाई दी तो कहीं सामूहिक पूजा-अर्चना और अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ के जीवन से प्रेरणा लेते हुए संयम, त्याग, अहिंसा और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में एकता, सेवा भावना और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। शाहदरा में मनाया गया अक्षय तृतीया का यह पर्व न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह सामाजिक समरसता, सेवा और आस्था का भव्य प्रतीक बनकर उभरा।

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