AI IVF: अब AI की मदद से साकार होगा मातृत्व का सपना, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में जल्द शुरू होगी आधुनिक सुविधा

AI IVF: अब AI की मदद से साकार होगा मातृत्व का सपना, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में जल्द शुरू होगी आधुनिक सुविधा
नई दिल्ली, 22 जून। मातृत्व का सपना देख रही उन महिलाओं के लिए राहत की खबर है, जिन्हें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एवं इससे संबद्ध अस्पताल में जल्द ही अत्याधुनिक आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) केंद्र शुरू होने जा रहा है। इस नए आईवीएफ केंद्र की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक होगी। इस तकनीक की मदद से भ्रूण यानी एंब्रियो के विकास की सटीक निगरानी की जा सकेगी और बेहतर भ्रूण चयन में डॉक्टरों को सहायता मिलेगी। इससे गर्भधारण की सफलता दर बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। सुचेता कृपलानी अस्पताल की निदेशक डॉ. सरिता बेरी ने बताया कि आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के संयोजन से उन दंपत्तियों को नई उम्मीद मिलेगी, जो लंबे समय से संतान सुख के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में एआई आधारित सिस्टम भ्रूण के विकास का सूक्ष्म विश्लेषण करेगा। यह सिस्टम डॉक्टरों को सबसे स्वस्थ भ्रूण का चयन करने में मदद करेगा, जिससे उपचार प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी बन सकेगी। एआई आधारित आईवीएफ तकनीक में भ्रूण के विकास की 24 घंटे निगरानी संभव होगी। इसके अलावा वैज्ञानिक तरीके से स्वस्थ भ्रूण चुनने, उपचार में मानवीय त्रुटियों को कम करने और मरीज की जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में आईवीएफ उपचार की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसके पीछे कई सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण हैं। करियर और शिक्षा के कारण देर से शादी और परिवार शुरू करना, बढ़ता तनाव, अनियमित जीवनशैली, जंक फूड, धूम्रपान और शराब का सेवन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। महिलाओं में पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस, मोटापा और अन्य हार्मोनल समस्याओं के बढ़ने से भी गर्भधारण में परेशानी सामने आ रही है। वहीं पुरुषों में स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या में कमी के मामले भी बढ़ रहे हैं। आईवीएफ को लेकर समाज में जागरूकता और स्वीकार्यता बढ़ने के कारण भी अधिक लोग इस तकनीक की ओर रुख कर रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित आईवीएफ जैसी आधुनिक सुविधाएं प्रजनन चिकित्सा को अधिक आधुनिक, सटीक और मरीज-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।





