CJP Protest: वोट चोरी के आरोपों पर देशभर में प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग; कई शहरों में हिरासत और ट्रैफिक जाम

CJP Protest: वोट चोरी के आरोपों पर देशभर में प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग; कई शहरों में हिरासत और ट्रैफिक जाम

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के समर्थन में 10 अक्टूबर को देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। भोपाल, अहमदाबाद, झांसी, बेंगलुरु और मुंबई समेत अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की अपेक्षा उठाई। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के संबंध में उठाए गए सवाल रहे। कई स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल लोगों को हिरासत में लिया, जबकि दिल्ली जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ाए जाने से यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में CJP के कार्यकर्ता शाहपुरा पार्क में एकत्रित हुए। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के नारे लगाते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध जताया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की अपेक्षा की। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि उनका विरोध कथित वोट चोरी के मुद्दे और चुनावी कार्यवाही में पारदर्शिता की अपेक्षा के संबंध में है।

गुजरात के अहमदाबाद में एलिसब्रिज इलाके में एमजे लाइब्रेरी के पास युवाओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने SIR की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की अपेक्षा की। विरोध को ध्यान में रखकर इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शन के समय महिलाओं समेत कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर उभरकर आई।

उत्तर प्रदेश के झांसी में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता लक्ष्मी गार्डन में एकत्रित हुए और नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की अपेक्षा की। सपा जिलाध्यक्ष बृजेन्द्र सिंह यादव ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर यह प्रदर्शन किया गया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है। फिर भी, वोट चोरी से जुड़े आरोप राजनीतिक दावे हैं और उनकी पुष्टि के लिए जुड़े हुए तथ्यों तथा चुनावी रिकॉर्ड की पड़ताल आवश्यक है।

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में AISA, SFI, AIDSO और AISF से जुड़े छात्र संगठनों ने SIR के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी केआर सर्कल के पास स्थित चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की अपेक्षा करते हुए राज्य सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की।

मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इनमें काफी संख्या में वरिष्ठ नागरिक भी शामिल थे। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए अपनी मांग दोहराई और चुनावी कार्यवाही में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही।

हरियाणा के करनाल में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक दिया। इसके पश्चात कुछ कार्यकर्ता सेक्टर-32 में सड़क पर बैठ गए, जिसके पश्चात उन्हें हिरासत में लिया गया। कांग्रेस नेता रघुवीर संधू ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, हरियाणा के नूंह जिले में कांग्रेस की जिला अध्यक्ष शहीदा खान और युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मुबीन खान तेड़िया को उनके घरों पर नजरबंद किए जाने की खबर उभरकर आई। इन नेताओं ने कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया।

दिल्ली में प्रदर्शन को ध्यान में रखकर गुरुग्राम-दिल्ली सीमा पर भी सुरक्षा के इंतजाम कड़ी रही। एनएच-48 स्थित सिरहौल बॉर्डर पर वाहनों की पड़ताल के कारण दिल्ली की ओर जाने वाले रास्ते पर लंबी कतारें लग गईं। इससे कार्यालय जाने वाले लोगों और अन्य यात्रियों को परेशानी हुई। पुलिस ने जनसामान्य से जुड़े परिवहन और संदिग्ध वाहनों की पड़ताल की, जबकि यातायात को नियंत्रित करने के प्रयास किए गए।

रेल यात्रियों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बरेली में दिल्ली की ओर जाने वाली कुछ ट्रेनों के निरस्त होने की खबर के पश्चात यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा। पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन पर भी दिल्ली जाने वाली चार ट्रेनें रद्द होने और कई ट्रेनों के देरी से चलने का विवरण उभरकर आई। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ यात्रियों को चार से पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ा। फिर भी, ट्रेन सेवाओं में व्यवधान के कारणों के संबंध में जुड़े हुए रेलवे अधिकारियों की तरफ से विस्तार से आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

इन प्रदर्शनों के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की कार्यवाही और कथित वोट चोरी के आरोप रहे। CJP तथा अलग-अलग विपक्षी संगठनों से जुड़े प्रदर्शन में शामिल लोगों ने इसे मतदान के अधिकार और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा बताया। दूसरी ओर, अलग-अलग शहरों में पुलिस की रोकथाम, हिरासत, नेताओं को नजरबंद किए जाने और यातायात तथा रेल सेवाओं पर पड़े असर के संबंध में विवाद गहरा गया। आने वाले दिनों में इस आंदोलन की आगे की रणनीति और चुनाव आयोग की कार्यवाही पर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

 

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