Ankita Bhandari Case: राहुल गांधी ने राष्ट्रपति मुर्मू को लिखी चिट्ठी, दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति रोकने की मांग
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के संबंध में राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी के नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। राहुल गांधी ने मांग की है कि अंकिता भंडारी प्रकरण में केंद्रीय पड़ताल ब्यूरो (CBI) की पड़ताल पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल का पदभार ग्रहण करने से रोका जाए। उन्होंने बताया कि प्रकरण में कथित वीआईपी की भूमिका के संबंध में अब भी सवाल उठ रहे हैं और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बनी हुई है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए अंकिता भंडारी के प्रकरण में पड़ताल की गति और कथित वीआईपी की पहचान के संबंध में प्रश्न उठाए। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि 19 वर्षीय अंकिता ने कथित तौर पर एक वीआईपी के उद्देश्य से अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार किया था। राहुल गांधी ने बताया कि वारदात के करीब चार साल बाद भी कथित वीआईपी की पहचान के संबंध में सवाल बने हुए हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि सरकार को इस नियुक्ति पर दोबारा विचार करने की सलाह दी जाए, ताकि अंकिता के माता-पिता की न्याय पाने की उम्मीद प्रभावित न हो।
दुष्यंत कुमार गौतम को 12 अक्टूबर 2026 को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने की घोषणा हुई थी। इस फैसले के पश्चात अंकिता भंडारी के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति से नियुक्ति पर रोक लगाने की अपील की। उनका कहना है कि जब तक सीबीआई प्रकरण में कथित वीआईपी की भूमिका की पड़ताल पूरी नहीं कर लेती, तब तक दुष्यंत गौतम को संवैधानिक पद की जिम्मेदारी नहीं संभालनी चाहिए। परिवार ने राष्ट्रपति से मुलाकात का समय देने की मांग भी की है।
14 अक्टूबर को राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की और उनके प्रति समर्थन जताया। इसी क्रम में परिवार ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग दोहराई। अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और मां सोनी देवी ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए बताया कि पड़ताल पूरी होने तक उन्हें पदभार ग्रहण नहीं करना चाहिए। परिवार ने यह भी चेतावनी दी है कि मांग पर सुनवाई नहीं होने की स्थिति में वे देहरादून में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल कर सकते हैं।
अंकिता भंडारी 19 वर्ष की थीं और उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी और चार दिन बाद उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था। इस प्रकरण में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को दोषी ठहराया गया था तथा उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वहीं, प्रकरण में एक कथित वीआईपी की भूमिका के संबंध में अलग से सवाल उठते रहे हैं। अंकिता का परिवार लंबे समय से इस पहलू की भी गहन पड़ताल की मांग कर रहा है।
दुष्यंत गौतम का नाम कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों और सार्वजनिक चर्चाओं के दौरान पता चला है। वहीं, इन आरोपों को अदालत में साबित नहीं किया गया है। दुष्यंत गौतम ने आरोपों को गलत बताते हुए मानहानि की कानूनी कदम भी की है। प्रकरण में दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले संबंधित सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण के संबंध में अंतरिम आदेश दिए थे। ऐसे में कथित वीआईपी की पहचान और दुष्यंत गौतम की भूमिका को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। सीबीआई की पड़ताल और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के निष्कर्ष ही इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से अपील की है कि अंकिता भंडारी प्रकरण की पड़ताल पूरी होने तक नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। अभी राष्ट्रपति या केंद्र सरकार की तरफ से राहुल गांधी के पत्र पर किसी फैसले की जानकारी सामने नहीं आई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार नियुक्ति के संबंध में क्या रुख अपनाती है और सीबीआई कथित वीआईपी पहलू की पड़ताल में आगे क्या कदम उठाती है।


