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One Station One Product: रेलवे स्टेशन बने स्थानीय उत्पादों का बड़ा बाजार, ₹162.39 करोड़ की बिक्री; 1.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिला अवसर

One Station One Product, Indian Railways, OSOP Scheme, Local Artisans India, Railway Station Products

One Station One Product: रेलवे स्टेशन बने स्थानीय उत्पादों का बड़ा बाजार, ₹162.39 करोड़ की बिक्री; 1.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिला अवसर

रिपोर्ट: अभिषेक ब्याहुत

नई दिल्ली। भारतीय रेल की ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ (One Station One Product-OSOP) योजना देश के स्थानीय कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और छोटे उत्पादकों के लिए एक बड़े बाजार के रूप में उभर रही है। रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को सीधे लाखों यात्रियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के तहत देशभर के 1,700 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर 2,000 से ज्यादा OSOP आउटलेट संचालित किए जा रहे हैं। इन आउटलेट के माध्यम से अब तक 162.39 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है, जबकि लगभग 1.5 लाख प्रत्यक्ष लाभार्थियों को अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिला है।

‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2022-23 में की गई थी। योजना का मुख्य उद्देश्य देश के अलग-अलग क्षेत्रों में तैयार होने वाले विशिष्ट स्थानीय उत्पादों को रेलवे के विशाल यात्री नेटवर्क के माध्यम से बड़ा बाजार उपलब्ध कराना है। इसके जरिए स्थानीय कारीगरों और छोटे उत्पादकों को ऐसे स्थान पर अपने उत्पाद प्रदर्शित और बेचने का मौका मिलता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं।

भारतीय रेलवे का नेटवर्क देश के लगभग हर हिस्से तक फैला हुआ है। ऐसे में रेलवे स्टेशनों को स्थानीय उत्पादों की बिक्री से जोड़ने का फायदा यह है कि किसी क्षेत्र की खास पहचान वाले उत्पाद अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहते। दूसरे राज्यों और शहरों से आने वाले यात्री भी इन उत्पादों को खरीद सकते हैं। इससे स्थानीय उत्पादों की पहचान बढ़ने के साथ कारीगरों और उत्पादकों के लिए आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

OSOP आउटलेट पर हस्तशिल्प, हैंडलूम, कपड़े, पारंपरिक वस्तुएं, खिलौने, चमड़े के उत्पाद, आभूषण और स्थानीय खाद्य सामग्री समेत कई प्रकार के उत्पाद बेचे जाते हैं। अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर वहां के क्षेत्रीय और पारंपरिक उत्पादों को प्राथमिकता दी जाती है। इससे रेलवे स्टेशन संबंधित जिले या राज्य की कला, संस्कृति और खानपान की पहचान को यात्रियों के सामने प्रस्तुत करने का माध्यम भी बन रहे हैं।

इस योजना के माध्यम से बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग और भागलपुरी सिल्क जैसे उत्पाद देशभर के यात्रियों तक पहुंच रहे हैं। मधुबनी चित्रकला बिहार की पारंपरिक लोककला की महत्वपूर्ण पहचान है, जबकि भागलपुरी सिल्क अपने विशेष कपड़े और बुनाई के लिए जाना जाता है। रेलवे स्टेशनों पर इन उत्पादों को स्थान मिलने से स्थानीय कलाकारों और बुनकरों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।

इसी तरह असम के पारंपरिक गमोसा और मेखला चादर को भी OSOP आउटलेट के जरिए बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। राजस्थान के कोटा डोरिया और सांगानेरी प्रिंट जैसे पारंपरिक वस्त्र भी योजना में शामिल हैं। इन उत्पादों की अपनी क्षेत्रीय पहचान है और रेलवे स्टेशनों पर बिक्री होने से दूसरे राज्यों के यात्री भी इन्हें आसानी से खरीद सकते हैं।

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कर्नाटक के प्रसिद्ध चन्नापटना खिलौने भी ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ योजना का हिस्सा हैं। पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाले ये खिलौने कर्नाटक की हस्तकला की पहचान माने जाते हैं। इसी तरह तमिलनाडु का कांचीपुरम सिल्क भी OSOP आउटलेट पर यात्रियों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

महाराष्ट्र की प्रसिद्ध कोल्हापुरी चप्पल और उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद ब्रासवेयर भी योजना के तहत प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं। मुरादाबाद अपने पीतल के हस्तशिल्प के लिए देश और विदेश में जाना जाता है। वहीं कोल्हापुरी चप्पल महाराष्ट्र के पारंपरिक हस्तनिर्मित उत्पादों में शामिल है। रेलवे स्टेशनों पर इनकी मौजूदगी स्थानीय उत्पादकों के लिए अतिरिक्त बिक्री का माध्यम तैयार कर रही है।

राज्यवार आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 378 OSOP इकाइयां संचालित हो रही हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 205 इकाइयां हैं। तमिलनाडु में 199 और उत्तर प्रदेश में 196 OSOP इकाइयां संचालित की जा रही हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि योजना का विस्तार देश के विभिन्न राज्यों में बड़े स्तर पर किया जा चुका है।

रेलवे ने छोटे उत्पादकों और कारीगरों के लिए योजना में भागीदारी को आसान बनाने की भी कोशिश की है। आउटलेट के लिए 15 दिनों का पंजीकरण शुल्क स्टेशन की श्रेणी के अनुसार केवल 500 रुपये से 1,000 रुपये के बीच रखा गया है। कम पंजीकरण शुल्क का उद्देश्य छोटे स्तर पर काम करने वाले कारीगरों और उत्पादकों को भी रेलवे स्टेशन जैसे बड़े बाजार तक पहुंचने का अवसर देना है।

योजना में डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। OSOP आउटलेट पर UPI, BHIM, POS मशीन और डिजिटल वॉलेट जैसे कैशलेस भुगतान माध्यमों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया गया है। इससे यात्रियों के लिए खरीदारी आसान होती है और छोटे विक्रेताओं को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिलता है।

रेलवे स्टेशनों पर स्थापित OSOP आउटलेट केवल बिक्री केंद्र के रूप में ही काम नहीं कर रहे, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान को प्रदर्शित करने का मंच भी बन रहे हैं। एक राज्य से दूसरे राज्य की यात्रा करने वाले लोग स्टेशन पर ही संबंधित क्षेत्र के विशिष्ट उत्पादों के बारे में जान सकते हैं और उन्हें खरीद सकते हैं।

योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देना भी है। कारीगरों, बुनकरों और छोटे उत्पादकों को अपने सामान की बिक्री के लिए बड़े शोरूम या महंगे व्यावसायिक स्थान की जरूरत नहीं पड़ती। रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध आउटलेट के माध्यम से उन्हें लगातार बड़ी संख्या में संभावित ग्राहक मिलते हैं।

अब तक 162.39 करोड़ रुपये की बिक्री इस योजना के बढ़ते दायरे को दर्शाती है। लगभग 1.5 लाख प्रत्यक्ष लाभार्थियों को अवसर मिलने से स्थानीय उत्पादन और पारंपरिक कारीगरी से जुड़े लोगों के लिए रेलवे एक महत्वपूर्ण मार्केटिंग प्लेटफॉर्म के रूप में सामने आया है।

रेलवे के अनुसार ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ योजना का विस्तार लगातार जारी है। अधिक रेलवे स्टेशनों और स्थानीय उत्पादों को योजना से जोड़ने के जरिए कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए बाजार का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के साथ यात्रियों को भी देश की विविध कला, संस्कृति, शिल्प और पारंपरिक उत्पादों तक आसानी से पहुंच मिल रही है।

 

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संवाददाता

Priyanka Singh

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