Police Encounter Case: पुलिस पर फायरिंग के 14 साल पुराने मामले में आरोपी बरी, अदालत ने स्वतंत्र गवाह और वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव पर उठाए सवाल
नोएडा। वर्ष 2012 में पुलिस मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग करने के आरोप से जुड़े मामले में सत्र अदालत ने बुलंदशहर निवासी आरोपी चांद को बरी कर दिया है। मामला थाना बादलपुर में दर्ज दो मुकदमों से संबंधित था। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
पुलिस के अनुसार 29 सितंबर 2012 को तत्कालीन थानाध्यक्ष ओमप्रकाश यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम गश्त पर थी। इसी दौरान एनटीपीसी रोड पर एक संदिग्ध व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने लगा।
पुलिस का दावा था कि संदिग्ध व्यक्ति ने भागते समय तमंचे से पुलिस टीम पर फायरिंग की। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने पीछा कर उसे पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाशी ली। पुलिस के मुताबिक उसके कब्जे से एक तमंचा, एक जिंदा कारतूस और एक खोखा कारतूस बरामद किया गया था।
इस घटना को लेकर थाना बादलपुर में आरोपी के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। मामले की विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया और लंबे समय तक मुकदमे की सुनवाई चली।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुलिसकर्मियों के बयान और कथित बरामदगी के आधार पर आरोपी पर लगे आरोप साबित करने का प्रयास किया।
हालांकि अदालत ने पूरे मामले के साक्ष्यों की समीक्षा के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गौर किया। अदालत ने पाया कि कथित घटनास्थल एक सार्वजनिक मार्ग पर स्थित था।
अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि घटनास्थल के पास एक चालू फैक्टरी मौजूद थी। ऐसे में मौके पर स्वतंत्र व्यक्तियों की मौजूदगी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था।
इसके बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी और कथित हथियार बरामदगी के समय किसी स्वतंत्र व्यक्ति को गवाह नहीं बनाया गया।
अदालत ने इस बात को महत्वपूर्ण माना कि अभियोजन का मामला मुख्य रूप से पुलिसकर्मियों के बयानों पर आधारित था। इन बयानों की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया।
इसके अलावा कथित फायरिंग और बरामद हथियार से संबंधित वैज्ञानिक साक्ष्य की कमी भी अदालत के सामने महत्वपूर्ण रही।
अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत सामग्री आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थी।
आपराधिक मामलों में किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन को आरोपों को संदेह से परे साबित करना होता है। इस मामले में अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य उस स्तर तक नहीं पहुंचते।
इसके बाद अदालत ने आरोपी चांद को संदेह का लाभ देते हुए दोनों मामलों से दोषमुक्त कर दिया।
करीब 14 साल पुराने इस मुकदमे में अदालत के फैसले के बाद आरोपी को पुलिस पर फायरिंग और संबंधित आरोपों से राहत मिल गई है।


