Buta Singh Remark Case: बूटा सिंह पर कथित अपमानजनक टिप्पणी मामले में SC आयोग सख्त, पंजाब पुलिस को पांच दिन में गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई के निर्देश
नई दिल्ली, 31 अगस्त। पंजाब के तरनतारन में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री स्वर्गीय बूटा सिंह को लेकर एक चुनावी सभा में कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने पंजाब पुलिस को मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तत्काल कदम उठाने और पांच दिनों के भीतर कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने की सिफारिश की है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मामले की जांच को जल्द पूरा करने पर भी जोर दिया है। आयोग ने कहा है कि जांच पूरी करने के बाद बिना अनावश्यक देरी के संबंधित अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
मामला पंजाब के तरनतारन में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री स्वर्गीय बूटा सिंह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। शिकायत के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने प्रकरण का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।
आयोग ने मामले की समीक्षा के दौरान पाया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया में देरी हुई। इसके साथ ही आयोग के समक्ष अपेक्षित कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश नहीं की गई।
इसे गंभीरता से लेते हुए आयोग ने पंजाब पुलिस को अब मामले में तत्काल आवश्यक कदम उठाने को कहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई करते हुए पांच दिनों के भीतर प्रगति और कार्रवाई की स्थिति से आयोग को अवगत कराने की सिफारिश की गई है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल गिरफ्तारी की कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहना चाहिए। जांच को जल्द से जल्द पूरा करते हुए उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर बिना अनावश्यक देरी के चार्जशीट दाखिल की जाए।
इस मामले में शिकायतकर्ता और स्वर्गीय बूटा सिंह के पुत्र सरबजोत सिंह की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने आया है। आयोग को बताया गया कि शिकायतकर्ता को कथित तौर पर धमकी भरे फोन आ रहे हैं।
इन शिकायतों को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने सरबजोत सिंह और उनके आश्रितों को तत्काल पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की अनुशंसा की है। यह सुरक्षा दिल्ली और पंजाब दोनों स्थानों पर उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
आयोग का मानना है कि शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का दबाव या सुरक्षा संबंधी खतरा पैदा न हो।
इसके साथ ही आयोग ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा करने की बात भी कही है। यदि मामले में किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने पर विचार करने की सिफारिश की गई है।
आयोग ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 4 के तहत भी कार्रवाई पर विचार करने को कहा है, यदि जांच में संबंधित लोक सेवकों की ओर से कानून के तहत निर्धारित कर्तव्यों की जानबूझकर उपेक्षा से जुड़ी परिस्थितियां सामने आती हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के इस रुख के बाद पंजाब पुलिस पर मामले की जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। आयोग ने स्पष्ट समय सीमा निर्धारित करते हुए पांच दिनों के भीतर कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
अब पंजाब पुलिस की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उठाए जाने वाले कदम और जांच की प्रगति महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही सरबजोत सिंह और उनके आश्रितों की सुरक्षा को लेकर भी तत्काल व्यवस्था करने की अनुशंसा की गई है।


