Mathura : पूरब आम्नाय गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ जी महाराज ने नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि नेपाल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से गोवर्धन पीठ का विशेष संरक्षित और धर्म शासित अधीनस्थ क्षेत्र है और इस संकट की घड़ी में गोवर्धन मठ पीड़ितों के साथ मजबूती से खड़ा है।
शंकराचार्य जी ने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और ईश्वर से उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की कामना की। उन्होंने हजारों लापता श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षित वापसी के लिए मां भगवती से प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि मृत आत्माओं की शांति और लापता लोगों के सकुशल मिलने की कामना को लेकर गोवर्धन पीठ में विशेष महायज्ञ का आयोजन किया गया है।
उन्होंने कहा कि नेपाल में हुआ नुकसान आकलन से कहीं ज्यादा है। हजारों लोग बेघर हो गए हैं और लाखों लोग प्रभावित हैं। भारत और नेपाल सरकार के विभिन्न अंग जैसे पुलिस, अर्धसैनिक बल, भारतीय सेना और राहतकर्मी पूरी तत्परता से खोज और बचाव कार्य में लगे हैं और उम्मीद है कि उन्हें अपने मिशन में सफलता मिलेगी। उन्होंने भारत सरकार और अन्य अंतरराष्ट्रीय सरकारों से अपील की कि वहां तत्काल प्रभाव से अधिक से अधिक राहत सामग्री और आवश्यक सहायता भेजी जाए।
चीन की भूमिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए शंकराचार्य जी ने कहा कि चीन ने दूसरी बार आपदा का संकेत दिया, यदि पहली बार भी समय पर सूचना दे दी होती तो इतने बड़े संकट और तबाही से बचा जा सकता था। उन्होंने चीन सरकार से मांग की कि वह नेपाल में हुए नुकसान की पूरी क्षतिपूर्ति करे और बेघर हुए लोगों के लिए नए मकान बनवाए। उन्होंने कहा कि चीन सीमाओं पर बांध संबंधी कोई भी कार्य शुरू करने से पहले पड़ोसी देशों की सुरक्षा का ध्यान रखे और उनसे सलाह मशवरा करे।
भारत-चीन संबंधों पर उन्होंने कहा कि चीन तेजी से महाशक्ति के रूप में उभर रहा है इसलिए उसका दायित्व भी बढ़ जाता है। भारत और चीन के रिश्तों में हो रहे सुधार का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक पहल है लेकिन इसके साथ ही पड़ोसी देशों के हितों और सुरक्षा का ध्यान रखा जाना अत्यंत आवश्यक है।


