Tank Overhauling Hub: जबलपुर में गरजेंगे ‘T-72 और T-90’, 472 करोड़ से बनेगा ओवरहॉलिंग हब; सालाना 80 टैंकों की होगी ओवरहॉलिंग
नई दिल्ली/जबलपुर। आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसी तकनीकों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, लेकिन टैंक अब भी भारतीय सेना की जमीनी युद्ध क्षमता का अहम हिस्सा हैं। इसी ताकत को और मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश के जबलपुर में 472 करोड़ रुपये की लागत से T-72 और T-90 टैंकों की अत्याधुनिक ओवरहॉलिंग सुविधा विकसित की जा रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को व्हीकल फैक्ट्री, जबलपुर में इस महत्वपूर्ण परियोजना का भूमिपूजन किया। नई सुविधा तैयार होने के बाद यहां भारतीय सेना के प्रमुख युद्धक टैंकों T-72 और T-90 की बड़े स्तर पर ओवरहॉलिंग की जा सकेगी।
नई ओवरहॉलिंग सुविधा की क्षमता सालाना करीब 80 टैंकों की होगी। इससे भारतीय सेना की टैंकों की मरम्मत, रखरखाव और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
भारतीय सेना को हर साल करीब 230 टैंकों की ओवरहॉलिंग की आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल तमिलनाडु के अवडी स्थित हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री में सालाना लगभग 150 टैंकों की ओवरहॉलिंग की क्षमता है। जबलपुर में 80 टैंकों की अतिरिक्त क्षमता विकसित होने से सेना की वार्षिक आवश्यकता को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।
टैंकों की ओवरहॉलिंग केवल सामान्य मरम्मत तक सीमित प्रक्रिया नहीं होती। इसमें टैंक की विभिन्न महत्वपूर्ण प्रणालियों की जांच, मरम्मत और जरूरत के अनुसार उपकरणों को बदलकर वाहन को दोबारा ऑपरेशनल स्थिति में तैयार किया जाता है। इससे पुराने टैंकों की युद्धक उपयोगिता और सेवा अवधि बनाए रखने में मदद मिलती है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति का जिक्र करते हुए कहा कि आज टैंक अकेले युद्ध नहीं लड़ते। वे ड्रोन, मिसाइल, तोपखाने, वायु शक्ति, निगरानी प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं के साथ एकीकृत युद्ध प्रणाली के हिस्से के रूप में काम करते हैं।
उन्होंने टैंकों को आधुनिक सेंसर और नई तकनीकों से लैस करने की जरूरत पर भी जोर दिया। बदलते युद्धक्षेत्र में केवल भारी हथियारों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी तकनीकी क्षमता, नेटवर्किंग और दूसरी युद्ध प्रणालियों के साथ समन्वय भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों में उन देशों की स्थिति अधिक मजबूत होगी, जिनके पास उन्नत तकनीक के साथ मजबूत सप्लाई चेन, पर्याप्त औद्योगिक क्षमता और तेजी से नवाचार करने की ताकत होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है।
जबलपुर में बनने वाला टैंक ओवरहॉलिंग हब स्थानीय उद्योगों के लिए भी नए अवसर लेकर आएगा। परियोजना से स्थानीय एमएसएमई को मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक और हाइड्रोलिक उपकरणों सहित विभिन्न रक्षा उपकरणों और कलपुर्जों की आपूर्ति से जुड़ने का अवसर मिलने की उम्मीद है।
इससे जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में रक्षा उद्योग से संबंधित औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। तकनीकी क्षेत्र से जुड़े युवाओं और कुशल कर्मचारियों के लिए भी इस परियोजना से नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
सरकार का फोकस महत्वपूर्ण रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने और देश के भीतर ही मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार विकसित करने पर है। ऐसे में जबलपुर की यह परियोजना सेना की ऑपरेशनल तैयारियों के साथ आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नई सुविधा के शुरू होने के बाद T-72 और T-90 टैंकों की ओवरहॉलिंग क्षमता बढ़ेगी और सेना को समय पर युद्ध के लिए तैयार टैंक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही जबलपुर को देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन और सैन्य वाहन रखरखाव केंद्र के रूप में और मजबूती मिलने की उम्मीद है।


