Land Fraud: फर्जी मुख्तारनामे से स्वतंत्रता सेनानी परिवार की जमीन हड़पने की कोशिश, छह लोगों के खिलाफ FIR

Land Fraud: फर्जी मुख्तारनामे से स्वतंत्रता सेनानी परिवार की जमीन हड़पने की कोशिश, छह लोगों के खिलाफ FIR

नोएडा। थाना सेक्टर-142 क्षेत्र में एक 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला की जमीन कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि जमीन का बैनामा कराने के लिए ऐसे मुख्तारनामे का इस्तेमाल किया गया, जिसका संबंधित उप-निबंधक कार्यालय में पंजीकरण ही नहीं हुआ था।

गांव नलगढ़ा निवासी मंजीत कौर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका परिवार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा रहा है। उनका दावा है कि उनके ससुर शहीद-ए-आजम भगत सिंह और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथी रहे थे। परिवार के इसी योगदान के चलते भारत सरकार की ओर से नलगढ़ा गांव में कृषि और निवास के लिए भूमि आवंटित की गई थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार समय के साथ इलाके में जमीन की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई। इसके बाद स्वतंत्रता सेनानी परिवार को आवंटित जमीन पर भी कथित भूमाफिया और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की नजर पड़ गई। आरोप है कि इसी जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार कर पूरा षड्यंत्र रचा गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अनिल कुमार, धीर सिंह, जयदीप, हुकुम पाल और अशोक कुमार समेत आरोपियों ने मिलकर एक कथित फर्जी मुख्तारनामा तैयार कराया। दस्तावेज को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के दोहरा स्थित उप-निबंधक कार्यालय में पंजीकृत बताया गया।

इसी कथित मुख्तारनामे को आधार बनाकर 14 दिसंबर 2023 को जमीन का बैनामा निष्पादित कराने का आरोप है। इसके बाद आरोपियों ने संबंधित जमीन पर अपना अधिकार जताना शुरू किया और उस पर कब्जा करने का प्रयास किया।

मामले में संदेह होने पर शिकायतकर्ता ने बैनामे और उससे जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच कराई। आरोप है कि जांच के दौरान सामने आया कि बैनामे में जिस खसरे का उल्लेख किया गया है, वह संबंधित जमीन से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित है। इसके बाद मुख्तारनामे की वास्तविकता की भी पड़ताल शुरू की गई।

शिकायतकर्ता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से मध्य प्रदेश के संबंधित उप-निबंधक कार्यालय से कथित मुख्तारनामे के पंजीकरण की जानकारी मांगी। शिकायत के अनुसार कार्यालय की ओर से लिखित जवाब में बताया गया कि संबंधित मुख्तारनामा वहां कभी पंजीकृत ही नहीं हुआ था।

इसके साथ ही कार्यालय की ओर से यह जानकारी भी दी गई कि वहां एक अगस्त 2015 से मैनुअल पंजीकरण बंद कर दिया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद दस्तावेज को असली और पंजीकृत दिखाया गया तथा इसी के आधार पर जमीन का बैनामा कराया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंप्यूटर के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें ऑनलाइन पंजीकृत और वास्तविक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया। पुलिस अब कथित मुख्तारनामे, बैनामे, जमीन के अभिलेख और पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है।

शिकायतकर्ता ने आरोपियों के आपराधिक इतिहास का भी दावा किया है। शिकायत के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े और धमकी से संबंधित मामले दर्ज रहे हैं। हालांकि मौजूदा मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

थाना सेक्टर-142 के प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार सिंह के अनुसार मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस दस्तावेजों की सत्यता और पूरे प्रकरण में आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

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