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Feeding Tube: फीडिंग ट्यूब से न घबराएं, सही देखभाल और पोषण से मरीज की रिकवरी होती है तेज

Feeding Tube: फीडिंग ट्यूब से न घबराएं, सही देखभाल और पोषण से मरीज की रिकवरी होती है तेज

नई दिल्ली। गंभीर बीमारी, स्ट्रोक, ब्रेन सर्जरी या निगलने में कठिनाई जैसी स्थितियों में फीडिंग ट्यूब (एंटरल फीडिंग) मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसकी सही देखभाल की जाए तो संक्रमण का खतरा कम होता है और मरीज की रिकवरी भी तेज होती है।

एम्स दिल्ली के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की प्रोफेसर डॉ. आशीष बिंद्रा के अनुसार फीडिंग ट्यूब का उपयोग उन मरीजों में किया जाता है जो किसी कारण से मुंह से सुरक्षित रूप से भोजन या पानी नहीं ले पाते। इसके माध्यम से भोजन, दवाइयां और आवश्यक तरल पदार्थ सीधे शरीर तक पहुंचाए जाते हैं, जिससे कुपोषण, निर्जलीकरण और कमजोरी से बचाव होता है।

उन्होंने बताया कि स्ट्रोक, ब्रेन सर्जरी, सिर या रीढ़ की गंभीर चोट, पार्किंसन, अल्जाइमर, गले, मुंह या भोजन नली के कैंसर तथा डिस्फेजिया (निगलने में कठिनाई) वाले मरीजों को फीडिंग ट्यूब की आवश्यकता पड़ सकती है।

ट्रॉमा सेंटर की प्रमुख आहार विशेषज्ञ वसुंधरा मिश्रा ने कहा कि फीडिंग ट्यूब वाले मरीजों को डॉक्टर और डाइटिशियन की सलाह के अनुसार संतुलित तरल आहार देना चाहिए। हर फीड से पहले और बाद में ट्यूब को साफ पानी से फ्लश करना, ट्यूब वाली जगह की रोजाना सफाई करना और हाथों की स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि ट्यूब वाली जगह पर लालिमा, सूजन, पस, तेज दर्द, बुखार, लगातार उल्टी, रिसाव या ट्यूब निकलने जैसी कोई समस्या दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीज के साथ-साथ उसके परिजनों और देखभाल करने वालों को भी फीडिंग ट्यूब के सही उपयोग और देखभाल का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

फीडिंग ट्यूब मुख्य रूप से एनजी (नाक से पेट), जी (सीधे पेट) और जे (छोटी आंत) ट्यूब के रूप में लगाई जाती है। मरीज की स्थिति और आवश्यकता के अनुसार डॉक्टर उचित विकल्प का चयन करते हैं। सही पोषण, नियमित देखभाल और चिकित्सकीय निगरानी से अधिकांश मरीज तेजी से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।

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