Nutrition Facts: ‘शुगर-फ्री’ के दावे पर नहीं, लेबल पर करें भरोसा, पैकेट के पीछे छिपा होता है असली सच

Nutrition Facts: ‘शुगर-फ्री’ के दावे पर नहीं, लेबल पर करें भरोसा, पैकेट के पीछे छिपा होता है असली सच

नई दिल्ली। अगर आप किसी खाद्य उत्पाद के पैकेट पर बड़े अक्षरों में लिखे ‘शुगर-फ्री’, ‘नो एडेड शुगर’ या ‘100% नेचुरल’ जैसे दावों को देखकर उसे तुरंत सेहतमंद मान लेते हैं, तो अब सावधान होने की जरूरत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे दावे हमेशा पूरी सच्चाई नहीं बताते। किसी भी पैक्ड फूड की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें मौजूद चीनी, वसा तथा अन्य तत्वों की सही जानकारी पैकेट के सामने नहीं, बल्कि पीछे छपी पोषण तालिका (Nutrition Facts) और सामग्री सूची (Ingredients List) में होती है।

एम्स दिल्ली की आहार विशेषज्ञ डॉ. वसुंधरा मिश्रा के अनुसार, यदि लोग खाद्य उत्पादों का लेबल सही तरीके से पढ़ने की आदत विकसित कर लें तो वे अतिरिक्त चीनी, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों और अनावश्यक रसायनों के सेवन से काफी हद तक बच सकते हैं। इससे मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पैक्ड फूड को खरीदने से पहले उसकी पोषण तालिका में ‘प्रति 100 ग्राम’ या ‘प्रति 100 मिली’ वाले कॉलम को प्राथमिकता से देखना चाहिए। कई कंपनियां ‘प्रति सर्विंग’ के आधार पर जानकारी देती हैं, जिससे वास्तविक मात्रा का अंदाजा लगाना कठिन हो जाता है। यदि किसी पेय पदार्थ में 100 मिली पर 10 ग्राम या उससे अधिक चीनी है, या ठोस खाद्य पदार्थ में 100 ग्राम पर 10 से 15 ग्राम से अधिक चीनी मौजूद है, तो उसका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है।

सामग्री सूची भी किसी उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता का महत्वपूर्ण संकेत देती है। यदि शुरुआती तीन अवयवों में चीनी, ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, कॉर्न सिरप, माल्टोडेक्सट्रिन, गुड़, शहद या फ्रूट कॉन्संट्रेट जैसे नाम शामिल हैं, तो इसका अर्थ है कि उस उत्पाद में चीनी की मात्रा अधिक है। इसी तरह हाइड्रोजेनेटेड वेजिटेबल फैट, वनस्पति या शॉर्टनिंग जैसे तत्व भी लंबे समय तक सेवन के लिए बेहतर विकल्प नहीं माने जाते।

डॉ. मिश्रा ने यह भी सलाह दी कि केवल ‘शुगर-फ्री’ लिखा होने से किसी उत्पाद को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे उत्पादों में अक्सर कृत्रिम मिठास (Artificial Sweeteners) का इस्तेमाल किया जाता है, जिनका भी संतुलित सेवन जरूरी है। खासतौर पर मधुमेह के मरीजों को केवल ‘शुगर-फ्री’ दावे पर भरोसा करने के बजाय उत्पाद में मौजूद कुल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी अवश्य जांचनी चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिश के अनुसार, एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन 25 ग्राम यानी लगभग छह चम्मच से कम फ्री शुगर का सेवन करना चाहिए। इसमें केवल मिठाई या चीनी ही नहीं, बल्कि फलों का जूस, शहद, सिरप और अन्य मीठे पेय पदार्थ भी शामिल होते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जरूरी है कि उपभोक्ता आकर्षक दावों के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करें और हर पैक्ड फूड खरीदने से पहले उसकी पोषण संबंधी जानकारी को ध्यान से पढ़ें।

 

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