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DME Accident: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर खड़ी बस में कैंटर की टक्कर, परिचालक की मौत

DME Accident: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर खड़ी बस में कैंटर की टक्कर, परिचालक की मौत

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में निजी बस के परिचालक की मौत हो गई। सेक्टर-62 के पास सड़क किनारे सवारियां उतार रही बस में पीछे से तेज रफ्तार कैंटर ने टक्कर मार दी। हादसे में बस का परिचालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

पुलिस के अनुसार रविवार सुबह करीब 6:15 बजे एक निजी बस लखीमपुर खीरी से यात्रियों को लेकर दिल्ली जा रही थी। सेक्टर-62 के पास दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बस चालक ने कुछ सवारियों को उतारने के लिए वाहन सड़क किनारे रोक दिया। इसी दौरान बस का परिचालक 33 वर्षीय सोनू गुप्ता बस की डिग्गी से यात्रियों का सामान निकालकर उन्हें दे रहा था।

उसी समय पीछे से तेज गति से आ रहे एक कैंटर ने बस में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि परिचालक सोनू गुप्ता उसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास मौजूद लोगों और पुलिस की मदद से उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने इलाज के दौरान उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही सेक्टर-58 थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बाद में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने दुर्घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने के साथ मामले की जांच शुरू कर दी है।

हादसे के कारण दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर कुछ समय तक यातायात प्रभावित रहा। दुर्घटनाग्रस्त बस और कैंटर को क्रेन की सहायता से सड़क से हटाया गया, जिसके बाद यातायात सामान्य हो सका। पुलिस और यातायात कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस लेन में बस खड़ी की गई थी, वह हाई-स्पीड लेन थी, जहां वाहन रोकना प्रतिबंधित है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि दुर्घटना में बस चालक, कैंटर चालक या अन्य किसी पक्ष की लापरवाही रही या नहीं। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

 

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