
New Delhi : केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने भारत मंडपम में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों को आमंत्रित किया गया, ताकि आयोग की सिफारिशों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की जा सके।
भारत सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4,35,236 करोड़ रुपये की अनुदान राशि देने का निर्णय लिया है। यह राशि 15वें वित्त आयोग की तुलना में 84 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ी हुई राशि का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाना, स्थानीय बुनियादी ढांचे का विकास करना, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार लाना और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाना है। कार्यशाला का उद्देश्य 16वें वित्त आयोग के अनुदानों के क्रियान्वयन की व्यवस्था पर विचार-विमर्श करना और पंचायती राज संस्थाओं के विकास के लिए राज्यों के सर्वोत्तम अनुभवों को साझा करना भी था।

कार्यशाला के दौरान पंचायती राज मंत्री, उत्तर प्रदेश, ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि 16वां वित्त आयोग केवल वित्तीय आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पंचायतों और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को अधिक मजबूत और जवाबदेह बनाना भी है। फंड में हुई यह ऐतिहासिक वृद्धि पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने, सेवाओं में सुधार करने और गांवों के विकास को नई गति देने का अवसर प्रदान करती है। हालांकि इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिक लचीलापन और मजबूत निगरानी तंत्र की भी आवश्यकता होगी, ताकि खर्च किया गया प्रत्येक रुपया लोगों के जीवन और सुशासन में सकारात्मक बदलाव ला सके। उत्तर प्रदेश ने पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए कई सक्रिय कदम उठाए हैं और आगे भी इन सुधारों को जमीन पर उतारने के लिए काम करता रहेगा।
कार्यशाला में पेयजल, स्वच्छता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण सड़क नेटवर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और अन्य बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए वित्त आयोग के अनुदानों के प्रभावी उपयोग पर चर्चा की गई। यह भी जोर दिया गया कि स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि वे विकास परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन स्वयं कर सकें और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर में सुधार ला सकें।
कार्यशाला में उत्तर प्रदेश द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने और ग्राम पंचायतों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए किए गए प्रयासों को भी साझा किया गया। उत्तर प्रदेश में कुल 57,694 ग्राम पंचायतें हैं, जो देश की कुल ग्राम पंचायतों का लगभग 22 प्रतिशत हैं। राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए कई प्रोत्साहन आधारित कदम भी उठाए हैं।
कार्यशाला में पंचायती राज मंत्रालय और विभिन्न राज्यों के पंचायती राज विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया और वित्त आयोग की सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा की।





