Noida Airport: अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल का काम अक्तूबर तक पूरा होगा, साल के अंत तक शुरू हो सकती हैं उड़ानें

Noida Airport: अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल का काम अक्तूबर तक पूरा होगा, साल के अंत तक शुरू हो सकती हैं उड़ानें
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसे अक्तूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद इसी वर्ष के अंत तक अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नायल) की लखनऊ में हुई बोर्ड बैठक में टर्मिनल निर्माण और एयरपोर्ट की अन्य तैयारियों की समीक्षा की गई।
नायल की 27वीं बोर्ड बैठक मंगलवार को लखनऊ स्थित लोक भवन में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने की। इस दौरान एयरपोर्ट से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पर चर्चा की गई। बैठक में निदेशक नागरिक उड्डयन निखिल टी. फुंडे और सचिव वित्त विभाग संदीप कौर को नायल के निदेशक मंडल में निदेशक के रूप में अनुमोदन भी दिया गया।
बैठक में एयरपोर्ट के पहले चरण के तहत शुरू की गई घरेलू और कार्गो सेवाओं की स्थिति की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। अब मुख्य रूप से फिनिशिंग का काम बाकी है, जिसे तेजी से पूरा किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार सितंबर या अक्तूबर तक टर्मिनल तैयार हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल के पूरा होने के बाद एयरपोर्ट पर विदेशी उड़ानों के संचालन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों का दावा है कि वर्ष 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं शुरू हो सकती हैं। इससे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को वैश्विक विमानन नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।
एयरपोर्ट को बड़े एविएशन हब के रूप में विकसित करने की तैयारी भी तेज कर दी गई है। इसके अगले चरणों में दूसरे रनवे, सर्विस रनवे और विमानन उद्योग से जुड़ी इकाइयों को स्थापित करने की योजना है। एयरपोर्ट के तीसरे चरण के लिए 14 गांवों की 2053 हेक्टेयर भूमि किसानों से ली जानी है।
इस भूमि का अधिग्रहण करीब 12 हजार किसानों से किया जाएगा। जिला प्रशासन के अनुसार अब तक लगभग आठ हजार किसानों को करीब 5500 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। अगले दो महीनों में मुआवजा वितरण पूरा कर जमीन कब्जे में लेने का लक्ष्य रखा गया है।
तीसरे चरण में ली जाने वाली जमीन पर क्रॉसिंग और सर्विस रनवे बनाए जाएंगे, जिनके माध्यम से विमान हैंगर तक पहुंच सकेंगे। इसके अलावा विमानन क्षेत्र से जुड़ी कई औद्योगिक इकाइयां भी स्थापित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र में रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
एयरपोर्ट के दूसरे चरण की 1365 हेक्टेयर जमीन पर मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) हब विकसित किया जाएगा। इसके लिए अकासा एयर के साथ समझौता किया जा चुका है। इसी चरण में करीब 490 एकड़ जमीन पर दूसरा रनवे बनाया जाएगा, जबकि लगभग 800 एकड़ क्षेत्र में एविएशन इंडस्ट्री विकसित करने की योजना है।
अधिकारियों के अनुसार देश में वर्ष 2031 तक विमानों की संख्या करीब 1800 तक पहुंचने का अनुमान है। वर्तमान में देश में लगभग 700 विमान हैं। इसी भविष्य की जरूरत को देखते हुए नोएडा एयरपोर्ट पर एमआरओ हब और विमानन उद्योग को विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विकास को तीन प्रमुख चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में 1334 हेक्टेयर क्षेत्र में एक रनवे और एक टर्मिनल विकसित किया जा रहा है। दूसरे चरण में 1365 हेक्टेयर क्षेत्र में दूसरा रनवे और एमआरओ हब बनाया जाएगा। तीसरे चरण में 2053 हेक्टेयर क्षेत्र में सर्विस रनवे और एविएशन इंडस्ट्री विकसित की जाएगी।
नोएडा एयरपोर्ट की पूरी योजना के तहत कुल पांच रनवे बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूरा होने के बाद यह एयरपोर्ट देश के प्रमुख विमानन केंद्रों में शामिल हो सकता है और उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा।




