KOSHIKAO KE POWERHOUSE: योग से मजबूत होता है कोशिकाओं का पावरहाउस माइटोकॉन्ड्रिया, AIIMS दिल्ली अध्ययन में खुलासा

KOSHIKAO KE POWERHOUSE: योग से मजबूत होता है कोशिकाओं का पावरहाउस माइटोकॉन्ड्रिया, AIIMS दिल्ली अध्ययन में खुलासा

योग को अब तक शरीर की लचीलापन, मानसिक शांति और फिटनेस से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन एक नए अध्ययन में इसके प्रभाव को कोशिकीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बताया गया है। एम्स दिल्ली के एक अध्ययन के अनुसार, नियमित योगाभ्यास शरीर की कोशिकाओं के भीतर मौजूद ऊर्जा केंद्र यानी माइटोकॉन्ड्रिया को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

अध्ययन में पाया गया है कि लगातार आठ सप्ताह तक योग का अभ्यास करने से कोशिकाओं की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में सुधार हो सकता है। योगाभ्यास से माइटोकॉन्ड्रिया अधिक सक्रिय और प्रभावी तरीके से काम करने लगते हैं, जिसका असर शरीर में ऊर्जा बढ़ने, थकान कम होने और शारीरिक कार्यक्षमता बेहतर होने के रूप में दिखाई दे सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, माइटोकॉन्ड्रिया शरीर की हर कोशिका में मौजूद एक महत्वपूर्ण संरचना है, जिसे कोशिका का ‘पावरहाउस’ कहा जाता है। इसका मुख्य काम भोजन और ऑक्सीजन को एटीपी नामक ऊर्जा में बदलना होता है। यही ऊर्जा शरीर के सभी अंगों को सही तरीके से काम करने में मदद करती है।

माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता कमजोर होने पर शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। इससे लगातार थकान, मांसपेशियों की कमजोरी, समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत और हृदय व तंत्रिका तंत्र से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।

एम्स दिल्ली के अध्ययन से जुड़ी शोधकर्ता डॉ. सुरभि गौतम और प्रो. रीमा दादा ने बताया कि योग किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं है, लेकिन चिकित्सा उपचार के साथ इसे अपनाने पर यह एक सुरक्षित, किफायती और प्रभावी पूरक पद्धति साबित हो सकता है।

शोध के निष्कर्षों के मुताबिक, योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर में कोशिकीय स्तर पर स्वास्थ्य सुधारने वाली जीवनशैली पद्धति के रूप में काम कर सकता है। नियमित योगाभ्यास से माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता बेहतर होने के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और कोशिकाओं की मरम्मत की प्रक्रिया में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि योग शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद कर सकता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कई गंभीर और उम्र से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारण माना जाता है। इसे नियंत्रित करने से शरीर की कोशिकाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिल सकती है।

माइटोकॉन्ड्रिया शरीर के उन अंगों के लिए बेहद जरूरी हैं, जिन्हें सबसे ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है। हृदय, मस्तिष्क और मांसपेशियों जैसी संरचनाओं में माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या अधिक होती है, क्योंकि इन अंगों को लगातार ऊर्जा की जरूरत होती है।

एम्स दिल्ली के इस अध्ययन ने योग के स्वास्थ्य लाभों को एक नए वैज्ञानिक नजरिए से सामने रखा है। शोध के अनुसार, नियमित योगाभ्यास शरीर को केवल बाहर से फिट नहीं बनाता, बल्कि अंदर से कोशिकाओं की कार्यक्षमता को भी बेहतर करने में भूमिका निभा सकता है।

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