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India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का राकेश टिकैत ने किया विरोध, बोले- किसानों से राय लिए बिना नहीं होनी चाहिए डील

India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का राकेश टिकैत ने किया विरोध, बोले- किसानों से राय लिए बिना नहीं होनी चाहिए डील

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। नोएडा में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता Rakesh Tikait ने कहा कि यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ है और यदि इसमें कृषि क्षेत्र की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर किसानों से कोई राय नहीं ली है।

राकेश टिकैत ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाला प्रस्तावित व्यापार समझौता देश के किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे किसी भी समझौते से पहले किसानों के संगठनों से बातचीत करनी चाहिए थी, लेकिन अब तक इस विषय पर कोई चर्चा नहीं की गई है।

उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख जैमीसन ग्रीयर की 23 और 24 जून को नई दिल्ली यात्रा के दौरान समझौते पर अंतिम दौर की चर्चा प्रस्तावित है। टिकैत का कहना है कि किसानों को अब तक यह नहीं बताया गया है कि इस समझौते से उन्हें क्या लाभ होगा और कृषि क्षेत्र पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

प्रेस वार्ता के दौरान टिकैत ने कहा कि यदि अमेरिका से बड़े पैमाने पर सस्ता अनाज, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल भारत में आने लगते हैं तो भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। उनका कहना है कि इससे घरेलू कृषि बाजार प्रभावित होगा और किसानों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर और छोटे दुकानदार इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध करेंगे।

बीकेयू के राष्ट्रीय महासचिव Yudhvir Singh ने भी समझौते को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक है और कई देश यहां अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता न हो।

युद्धवीर सिंह ने कहा कि यदि अमेरिका से खाद्य तेल का आयात बढ़ता है तो देश के सोयाबीन और अन्य तिलहन उत्पादक किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपने किसानों को लगभग 70 प्रतिशत तक सब्सिडी देता है, जबकि भारत में कृषि सब्सिडी का स्तर काफी कम है। ऐसी स्थिति में भारतीय किसान वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित समझौते में अमेरिकी उत्पादों पर शून्य या बेहद कम आयात शुल्क लगाने की चर्चा हो रही है, जबकि भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजारों में अधिक शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। बीकेयू नेताओं का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

बीकेयू ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि किसी भी व्यापार समझौते से पहले कृषि क्षेत्र पर उसके प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए और किसानों को विश्वास में लिया जाना चाहिए।

फिलहाल भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चर्चाएं जारी हैं। इस बीच किसान संगठनों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों और चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

 

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