NMRC: एनएमआरसी को बड़ी राहत, NCLT ने खारिज की 7 करोड़ रुपये से अधिक की दिवाला याचिका
NMRC: एनएमआरसी को बड़ी राहत, NCLT ने खारिज की 7 करोड़ रुपये से अधिक की दिवाला याचिका
नोएडा। नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एनएमआरसी) को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) से बड़ी राहत मिली है। एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ ने एम्पायर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (ईटीएसएल) द्वारा दायर दिवाला याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में कहा कि दोनों पक्षों के बीच सेवा गुणवत्ता, अनुबंधीय दायित्वों और भुगतान कटौती को लेकर पहले से विवाद मौजूद है, इसलिए इस मामले में दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। मामला दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता की धारा-9 के तहत दायर किया गया था। ईटीएसएल ने दावा किया था कि नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन पर उसके लगभग 7.09 करोड़ रुपये के परिचालन बकाये हैं। कंपनी ने इस राशि की वसूली के लिए एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया था और एनएमआरसी के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी। विवाद की जड़ 15 जनवरी 2016 को हुए एक बस संचालन समझौते से जुड़ी है। इस समझौते के तहत ईटीएसएल को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दोनों शहरों के बीच संपर्क मार्गों पर 100 लो-फ्लोर वातानुकूलित सीएनजी बसों का संचालन करना था। कंपनी का आरोप था कि समझौते के अनुरूप उसे पूरी क्षमता से बस संचालन का अवसर नहीं मिला और 100 बसों के स्थान पर केवल 50 बसें ही सेवा में लगाई जा सकीं। ईटीएसएल के अनुसार उसने शेष 50 बसों के संचालन को लेकर कई बार एनएमआरसी से संपर्क किया, लेकिन उसे कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। कंपनी का यह भी कहना था कि समझौते के तहत एनएमआरसी को बिल प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर 50 प्रतिशत भुगतान करना था तथा शेष राशि अगले 15 दिनों के भीतर जारी की जानी थी। अनुबंध में भुगतान में देरी होने की स्थिति में नौ प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज देने का भी प्रावधान था। हालांकि सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से अनुबंध की शर्तों, सेवाओं की गुणवत्ता और भुगतान संबंधी मुद्दों को लेकर विवाद चला आ रहा था। ऐसे मामलों में आईबीसी के प्रावधानों का उपयोग ऋण वसूली के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर एनसीएलटी ने ईटीएसएल की याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले को एनएमआरसी के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जहां पहले से वास्तविक और गंभीर विवाद मौजूद हो, वहां दिवाला प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों का समाधान अनुबंध और सिविल कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। एनसीएलटी के इस निर्णय के बाद फिलहाल एनएमआरसी के खिलाफ दिवाला कार्यवाही की संभावना समाप्त हो गई है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच अनुबंध और भुगतान से जुड़े विवादों का निपटारा अन्य कानूनी मंचों पर जारी रह सकता है।


