
बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक बस्तर में आयोजित हो रही है और आज पूरा बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारत को नक्सलवाद से मुक्त करने का श्रेय सुरक्षाबलों के जवानों की बहादुरी और परिश्रम को जाता है। उन्होंने बताया कि एजेंसियों ने सटीक इनपुट जुटाए और राज्यों की पुलिस तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ समन्वय कर समयबद्ध कार्रवाई की गई। साथ ही सरकार की समग्र नीति के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास पहुंचाने का काम भी किया गया।
अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, क्योंकि प्रभावित क्षेत्र लगभग पांच दशक तक विकास की दौड़ में पीछे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इन इलाकों को देश के अन्य हिस्सों के बराबर विकास नहीं मिलेगा, तब तक प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने देश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री Narendra Modi का अभिनंदन भी किया।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय किया और जरूरत पड़ने पर नेतृत्व भी दिया, जिसका परिणाम है कि आज बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है।
गृह मंत्री ने कहा कि राज्यों और केंद्र के बीच विवादित मुद्दों को समाप्त कर सकारात्मक माहौल में बैठक आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि बैठक का मुख्य फोकस विकास कार्यों की मॉनिटरिंग पर रहा। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संघीय ढांचा मजबूत हुआ है और क्षेत्रीय परिषद की बैठकों के कारण राज्यों तथा केंद्र के बीच विवादों में कमी आई है।
अमित शाह ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। हिमालयी क्षेत्र से लेकर गंगा-यमुना के मैदानी इलाकों और मध्य भारत के वन एवं खनिज समृद्ध क्षेत्रों तक फैला यह इलाका देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र देश के खाद्यान्न भंडार को मजबूत करता है और खनिज संपदा देश की आर्थिक प्रगति को गति देती है।
उन्होंने बताया कि 2004 से 2014 के बीच क्षेत्रीय परिषद की केवल 11 बैठकें हुई थीं, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह संख्या बढ़कर 32 हो गई। इसी अवधि में स्टैंडिंग कमेटी की बैठकों की संख्या 14 से बढ़कर 35 पहुंच गई। उन्होंने कहा कि पहले 10 वर्षों में 569 मुद्दों पर चर्चा हुई थी, जबकि 2014 से 2026 के बीच 1729 मुद्दों पर विचार हुआ और करीब 80 प्रतिशत मामलों का समाधान कर लिया गया।
गृह मंत्री ने जल जीवन मिशन-2 पर अभी से फोकस करने की जरूरत बताई और कहा कि हर घर तक नल से जल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण और समाज कल्याण को संवेदनशील विषय बताते हुए कुपोषण के खिलाफ संयुक्त प्रयासों का आह्वान किया। साथ ही स्कूल ड्रॉपआउट दर कम करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शहरी नियोजन, जन स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार के क्षेत्रों में तेजी से काम करने की आवश्यकता है। ग्रामीण विकास और लोगों को सशक्त बनाने वाली योजनाओं पर विशेष ध्यान देने की भी अपील की।
अमित शाह ने कहा कि हर पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध होना बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि अधिकांश सरकारी योजनाएं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) आधारित हैं। उन्होंने राज्यों से बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार के लिए ठोस प्रयास करने को कहा।
उन्होंने कहा कि पॉक्सो और दुष्कर्म मामलों में समय पर डीएनए जांच होने से दोषसिद्धि की दर लगभग शत-प्रतिशत तक पहुंच सकती है। अदालतों में पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालतें गठित करने की जरूरत पर भी उन्होंने जोर दिया।
गृह मंत्री ने राज्यों से 1930 हेल्पलाइन को गृह मंत्रालय के प्रारूप के अनुरूप अपडेट करने और कॉल सेंटर को मजबूत बनाने का आग्रह किया। मिलावटखोरी के मामलों में दोषी दुकानों और कार्रवाई की सार्वजनिक जानकारी देने की भी बात कही ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े।
उन्होंने कहा कि नई आपराधिक न्याय संहिताओं का बेहतर तरीके से क्रियान्वयन हुआ है, लेकिन अभी भी कई बिंदुओं पर और काम करने की आवश्यकता है। अमित शाह ने लक्ष्य रखा कि 2029 से पहले देश में हर आपराधिक मुकदमे को सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल के भीतर निपटाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
