Lenskart Dress Code Controversy: नोएडा में तिलक-कलावा विवाद ने पकड़ा तूल, कंपनी ने दी सफाई और बदली गाइडलाइन

Lenskart Dress Code Controversy: नोएडा में तिलक-कलावा विवाद ने पकड़ा तूल, कंपनी ने दी सफाई और बदली गाइडलाइन
नोएडा में चश्मा बनाने और बेचने वाली कंपनी Lenskart को लेकर ड्रेस कोड विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोशल मीडिया पर कंपनी की एक पुरानी स्टाइल गाइड वायरल होने के बाद यह मामला शुरू हुआ, जिसमें कथित तौर पर हिजाब की अनुमति का जिक्र था लेकिन बिंदी, तिलक और अन्य हिंदू धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख नहीं था। इस असमानता के आरोपों ने देखते ही देखते बड़ा विवाद खड़ा कर दिया, जो अब सड़कों तक पहुंच चुका है।
बताया जा रहा है कि करीब एक महीने पहले कंपनी ने अपने स्टोर्स के कर्मचारियों के लिए नई ड्रेस कोड पॉलिसी लागू की थी। इस पॉलिसी में कर्मचारियों को तिलक, बिंदी, सिंदूर और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने से मना किया गया था। जैसे ही यह जानकारी सामने आई, देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध शुरू हो गया और सोशल मीडिया पर भी कंपनी को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा।
विवाद बढ़ने के बाद Lenskart ने 18 अप्रैल को आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। कंपनी ने कहा कि उसने ग्राहकों और समुदाय की प्रतिक्रियाओं को गंभीरता से सुना है और अपनी इन-स्टोर स्टाइल गाइड को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक किया है। नई गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया कि बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे सभी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों की अनुमति होगी। साथ ही कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि पहले की कुछ कम्युनिकेशन से कर्मचारियों की भावनाएं आहत हुईं और इसके लिए माफी भी मांगी गई।
हालांकि, कंपनी की इस सफाई और संशोधित गाइडलाइन के बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ। मंगलवार को Noida के सेक्टर-110 स्थित एक शोरूम में हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने शोरूम के अंदर जाकर कर्मचारियों को तिलक लगाया और कलावा बांधा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर किसी भी धार्मिक प्रतीक को पहनने की स्वतंत्रता है, तो किसी एक समुदाय के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
संकल्प सेवा एनजीओ से जुड़ी विदुषी शर्मा ने आरोप लगाया कि कंपनी ने शुरुआत में हिंदू धार्मिक प्रतीकों को लेकर प्रतिबंधात्मक रवैया अपनाया, जिससे समुदाय विशेष की भावनाएं आहत हुईं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुधार्मिक देश में सभी को अपनी आस्था के अनुसार प्रतीकों को धारण करने की आजादी होनी चाहिए और इसी अधिकार के समर्थन में वे शोरूम पहुंचे थे।
घटना के दौरान कुछ ग्राहकों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि कलावा या धार्मिक टैटू जैसी चीजें व्यक्तिगत आस्था का हिस्सा हैं और इनके आधार पर किसी को रोका जाना उचित नहीं है। स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस भी पहुंची और पूरे मामले की जानकारी लेकर स्थिति को शांत कराया।
नई ड्रेस कोड गाइडलाइन के अनुसार अब कर्मचारियों को कंपनी की टी-शर्ट, गहरे नीले रंग की साधारण जींस और बंद जूते पहनना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही कड़ा, चूड़ियां, मंगलसूत्र, कलावा जैसे धार्मिक आभूषण पहनने की अनुमति दी गई है। बिंदी, तिलक और सिंदूर जैसे धार्मिक चिन्हों को भी पूरी तरह स्वीकार किया गया है। इसके अलावा पगड़ी और हिजाब जैसे सिर ढकने वाले परिधान भी मान्य होंगे, बशर्ते वे साफ-सुथरे हों और कार्य में किसी प्रकार की बाधा न डालें।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह कार्यस्थल पर प्रोफेशनल माहौल बनाए रखने, स्वच्छता का पालन करने और सभी कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही कर्मचारियों को भरोसा दिलाया गया है कि वे बिना किसी डर के अपनी शिकायतें एचआर विभाग के सामने रख सकते हैं।
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