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Child Health Alert: शिशुओं में असामान्य सूजन को न करें नजरअंदाज, समय पर जांच जरूरी

Child Health Alert: शिशुओं में असामान्य सूजन को न करें नजरअंदाज, समय पर जांच जरूरी

नई दिल्ली में विशेषज्ञों ने शिशुओं में दिखाई देने वाली असामान्य सूजन और जन्मजात समस्याओं को गंभीरता से लेने की अपील की है। डॉक्टरों का कहना है कि अक्सर माता-पिता इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि समय पर पहचान और इलाज न होने पर ये समस्याएं गंभीर जटिलताओं का रूप ले सकती हैं।

देश में हर साल एक लाख से अधिक नवजात ऐसे जन्मजात शारीरिक विकारों के साथ पैदा होते हैं, जिनमें इनगुइनल हर्निया, हाइड्रोसील, अनडिसेंडेड टेस्टिस और अम्बिलिकल हर्निया प्रमुख हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन स्थितियों की समय पर पहचान बेहद जरूरी है, ताकि बच्चों को सही उपचार मिल सके और भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके।

इनगुइनल हर्निया में पेट के अंदर की आंत या अन्य हिस्सा कमर या जांघ के पास उभार के रूप में बाहर आ जाता है, जो रोने या खांसने पर बढ़ सकता है। यह स्थिति अपने आप ठीक नहीं होती और इसका स्थायी इलाज सर्जरी ही है। इलाज में देरी होने पर आंत फंसने या संक्रमण जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।

हाइड्रोसील में अंडकोष के आसपास तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे सूजन दिखाई देती है। यह अक्सर बिना दर्द के होता है और कई मामलों में एक वर्ष की उम्र तक ठीक हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक रहने पर सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। वहीं अनडिसेंडेड टेस्टिस में जन्म के बाद अंडकोष थैली में नहीं आते, जिससे भविष्य में बांझपन या कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

अम्बिलिकल हर्निया में नाभि के पास मांसपेशियों की कमजोरी के कारण उभार दिखाई देता है, जो रोने या हंसने पर अधिक स्पष्ट हो जाता है। अधिकांश मामलों में यह दो से तीन साल की उम्र तक अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन गंभीर स्थिति में सर्जरी जरूरी हो सकती है।

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि छोटे बच्चे अक्सर खिलौनों में लगे बैटरी सेल निगल लेते हैं, जिससे भोजन नली में गंभीर क्षति हो सकती है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कोटेड बैटरी सेल जैसे सुरक्षित विकल्पों को अनिवार्य किया जाए।

एम्स दिल्ली की बाल शल्य चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर शिल्पा शर्मा ने कहा कि किसी भी प्रकार की असामान्य सूजन, उभार या शारीरिक बदलाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच और विशेषज्ञ परामर्श से इन समस्याओं का प्रभावी इलाज संभव है और अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।

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