Noida Dog Bite Cases: रोज 100 से ज्यादा लोगों को काट रहे कुत्ते, अस्पतालों में बढ़ी वैक्सीन की मांग

Noida Dog Bite Cases: रोज 100 से ज्यादा लोगों को काट रहे कुत्ते, अस्पतालों में बढ़ी वैक्सीन की मांग

नोएडा में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। तमाम प्रयासों और योजनाओं के बावजूद शहर में डॉग बाइट के मामलों में कमी नहीं आ रही है। हालात ऐसे हैं कि रोजाना 100 से अधिक लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं और इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।

जिला अस्पताल के सीनियर फार्मासिस्ट गिरेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, अस्पताल में हर दिन 200 से 400 एंटी रेबीज वैक्सीन की डोज लगाई जा रही हैं। इनमें से करीब 30 से 35 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जो पहली बार वैक्सीन लगवाने आते हैं, जबकि बाकी लोग दूसरी, तीसरी या चौथी डोज के लिए आते हैं। इससे साफ है कि रोजाना बड़ी संख्या में नए डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, बीते कुछ दिनों में भी अस्पताल में वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या लगातार अधिक बनी हुई है। 28 मार्च को 323, 27 मार्च को 330, 26 और 25 मार्च को 147-147, 24 मार्च को 226 और 20 मार्च को 335 लोग अस्पताल पहुंचे। ये आंकड़े शहर में बढ़ते खतरे की ओर इशारा करते हैं।

नोएडा प्राधिकरण की ओर से आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए शेल्टर होम बनाए जा रहे हैं और नसबंदी अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके अलावा सेक्टर और सोसाइटी की आरडब्ल्यूए और एओए द्वारा फीडिंग पॉइंट तय किए जा रहे हैं, ताकि कुत्ते इधर-उधर भटकने के बजाय एक निश्चित स्थान पर रहें और लोगों पर हमले कम हों। हालांकि इन प्रयासों के बावजूद स्थिति में अभी तक अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट लेता है तो उसे 24 घंटे के भीतर एंटी रेबीज वैक्सीन की पहली डोज जरूर लगवानी चाहिए। इसके बाद तीसरे दिन दूसरी, सातवें दिन तीसरी और 28वें दिन चौथी डोज लगाई जाती है। गंभीर मामलों के लिए एंटी रेबीज सीरम भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

यह स्थिति शहर में सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा, तभी इस बढ़ते खतरे पर काबू पाया जा सकेगा।

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