Delhi Health Crisis: लोकनायक अस्पताल में फैकल्टी की कमी, न्यूरो सर्जरी कोर्स पर संकट

Delhi Health Crisis: लोकनायक अस्पताल में फैकल्टी की कमी, न्यूरो सर्जरी कोर्स पर संकट
नई दिल्ली में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक गंभीर स्थिति सामने आई है। Lok Nayak Hospital में न्यूरो सर्जरी विभाग में फैकल्टी की कमी के चलते सुपर स्पेशलिटी कोर्स एमसीएच न्यूरो सर्जरी और डीएम न्यूरो एनेस्थीसिया पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पिछले करीब एक वर्ष से एक अहम फैकल्टी पद खाली पड़ा है, जिससे छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है।
यह अस्पताल Maulana Azad Medical College से संबद्ध है और देश में न्यूरो सर्जरी के विशेषज्ञ तैयार करने के लिए जाना जाता है। मौजूदा हालात को देखते हुए प्रशासन ने दोनों कोर्स के छात्रों को Govind Ballabh Pant Hospital में शिफ्ट कर दिया है। हालांकि इस फैसले को विश्वविद्यालय नियमों के खिलाफ भी बताया जा रहा है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पहले से ही न्यूरो सर्जनों की भारी कमी है। लगभग 140 करोड़ की आबादी के लिए केवल 1900 से 3700 न्यूरो सर्जन उपलब्ध हैं, जो बेहद कम संख्या मानी जाती है। ऐसे में प्रशिक्षण संस्थानों पर इस तरह का संकट भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि National Medical Commission के मानकों के अनुसार न्यूरो सर्जरी कोर्स के लिए न्यूनतम 16 बेड आवश्यक होते हैं, जबकि लोकनायक अस्पताल में 86 बेड का समर्पित वार्ड मौजूद है और 24 घंटे इलाज की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके बावजूद फैकल्टी की कमी के कारण कोर्स प्रभावित हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाएं, स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर और स्पाइनल इंजरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में न्यूरो सर्जरी सेवाओं की मांग आने वाले समय में और बढ़ेगी, लेकिन यदि प्रशिक्षण व्यवस्था कमजोर होती है तो इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ेगा।
फिलहाल एमसीएच और डीएम कोर्स में दाखिले की काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है। यदि जल्द ही फैकल्टी नियुक्ति का समाधान नहीं निकला, तो 2025-26 सत्र में प्रवेश प्रभावित हो सकता है। इससे भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और बढ़ने की आशंका है।
प्रशासन की ओर से चिकित्सा निदेशक डॉ. बी.एल. चौधरी ने कहा है कि छात्रों को अस्थायी रूप से दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया है और दोनों कोर्स भविष्य में जारी रहेंगे। उन्होंने इसे नीतिगत और संस्थागत प्रक्रिया से जुड़ा मामला बताया।
स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते फैकल्टी की नियुक्ति नहीं की गई, तो न केवल मेडिकल शिक्षा बल्कि गंभीर न्यूरो सर्जरी से जुड़े मरीजों के इलाज पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। ऐसे में यह मुद्दा केवल एक संस्थान तक सीमित न रहकर पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी बनता जा रहा है।
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