
India France Partnership: वैश्विक स्वास्थ्य में भारत-फ्रांस साझेदारी, 2030 तक 30 हजार भारतीय छात्रों को फ्रांस में मिलेगा मौका
नई दिल्ली, 18 फरवरी। वैश्विक स्वास्थ्य, चिकित्सा शोध, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में भारत और फ्रांस ने सहयोग को नई दिशा देने का संकल्प लिया है। वर्ष 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों को फ्रांस के उच्च शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश देने का लक्ष्य तय किया गया है। इस पहल से दोनों देशों के बीच शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को मजबूती मिलेगी, साथ ही वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों को गति मिलेगी।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नई दिल्ली स्थित एम्स दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 10,000 भारतीय छात्र प्रतिवर्ष फ्रांस में उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं, लेकिन अब इस संख्या को तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी सहमति बनी है और यह लक्ष्य पूरी तरह संभव है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने छात्रों के लिए वीजा प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक बनाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र का पीएचडी कार्यक्रम तीन वर्षों का है और उसे केवल एक वर्ष का वीजा दिया जाए तो यह उचित व्यवस्था नहीं है। फ्रांस प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा और छात्रों व शैक्षणिक संस्थानों की आवश्यकताओं के अनुरूप वीजा व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। उनका कहना था कि सुगम वीजा प्रणाली शिक्षा और अनुसंधान सहयोग को नई ऊंचाई तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी।
इस अवसर पर एम्स में ‘इंडो-फ्रेंच कैंपस ऑन एआई इन ग्लोबल हेल्थ’ की स्थापना की घोषणा भी की गई। राष्ट्रपति मैक्रों और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने संयुक्त रूप से इस पहल का उद्घाटन किया। इस कैंपस का उद्देश्य एआई आधारित स्वास्थ्य समाधान, चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से भारतीय और फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और उच्च शिक्षण संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाएगा।
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि 10-15 वर्ष पहले भारत फ्रांस के लिए छात्रों का प्रमुख स्रोत नहीं था, लेकिन अब दोनों देश शिक्षा क्षेत्र में गहरे सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भारतीय छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और इससे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक उत्कृष्टता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूती मिलेगी।
एम्स के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास और स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने भी राष्ट्रपति मैक्रों का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि भारत और फ्रांस के विशेषज्ञ वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों, डिजिटल हेल्थ, मेडिकल टेक्नोलॉजी और एआई आधारित उपचार प्रणालियों पर मिलकर काम करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा और शोध के अवसर मिलेंगे, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक संबंध भी और मजबूत होंगे। चिकित्सा अनुसंधान, डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यह साझेदारी भविष्य में वैश्विक स्तर पर नई मिसाल पेश कर सकती है।





