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Semiconductor Mission 2.0: उत्तर भारत में यीडा क्षेत्र सेमीकंडक्टर का हब बनेगा

Semiconductor Mission 2.0: उत्तर भारत में यीडा क्षेत्र सेमीकंडक्टर का हब बनेगा

नोएडा। केंद्र सरकार द्वारा बजट में सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा के बाद यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र उत्तर भारत के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर निर्माण हब के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सेक्टर-28 में पहली सेमीकंडक्टर इकाई स्थापित करने के लिए 48 एकड़ भूमि का आवंटन किया जा चुका है और कंपनी ने मौके पर बाउंड्री वॉल निर्माण तथा मिट्टी परीक्षण का कार्य शुरू कर दिया है। अनुमान है कि यह इकाई लगभग डेढ़ वर्ष के भीतर उत्पादन शुरू कर देगी, जिससे क्षेत्र की औद्योगिक पहचान को नई दिशा मिलेगी।

एचसीएल और फॉक्सकॉन के संयुक्त उपक्रम मैसर्स इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद 18 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि आवंटन पत्र सौंपा था। कंपनी इस परियोजना में 3706.15 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस बड़े निवेश से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 4000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। यह इकाई प्रतिदिन 2,40,000 स्मॉल पैनल ड्राइवर आईसी और डिस्प्ले इंटीग्रेटेड सर्किट का निर्माण करेगी, जिनका उपयोग मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है।

परियोजना के संचालन के लिए प्रतिदिन लगभग 19 हजार केवीए बिजली और दो हजार एमएलडी पानी की आवश्यकता होगी। इसके लिए विशेष बिजली आपूर्ति व्यवस्था और जल प्रबंधन ढांचे को विकसित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की हाई-टेक यूनिट स्थापित होने से पूरे क्षेत्र में सहायक उद्योगों, सप्लाई चेन कंपनियों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा।

रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं के कारण पिछले कुछ वर्षों में सेमीकंडक्टर की भारी कमी देखी गई है, जिससे ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग प्रभावित हुए। भारत सरकार आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। उत्तर प्रदेश में इन इकाइयों की स्थापना से देश की आयात निर्भरता कम होगी और रणनीतिक क्षेत्रों में तकनीकी मजबूती आएगी।

प्रदेश सरकार निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दे रही है। सेमीकंडक्टर इकाई लगाने वाली कंपनियों को 75 प्रतिशत भूमि सब्सिडी, 100 करोड़ रुपये की पूंजी सब्सिडी, अनुसंधान के लिए दो करोड़ रुपये की सहायता तथा 10 वर्षों तक पीएफ समेत अन्य वित्तीय लाभ दिए जाएंगे। शत-प्रतिशत एफडीआई की अनुमति से विदेशी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

सेमीकंडक्टर मूलतः सिलिकॉन चिप होती है, जो किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का मस्तिष्क मानी जाती है। यह कंट्रोलिंग और मेमोरी फंक्शन को संचालित करती है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, माइक्रोवेव, ऑटोमोबाइल और आधुनिक गैजेट्स की बढ़ती मांग के साथ सेमीकंडक्टर की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ रही है।

अब तक पांच कंपनियों ने यीडा क्षेत्र में इकाई लगाने के लिए आवेदन किया है। सेक्टर-28 में पहली इकाई को भूमि आवंटित हो चुकी है, जबकि टार्क कंपनी ने 125 एकड़, भारत सेमी सिस्टम और कीन्स सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड ने 50-50 एकड़ तथा एडिटेक सेमीकंडक्टर ने 100 एकड़ में निवेश प्रस्ताव रखा है। इन कंपनियों को सेक्टर-10 में जमीन दिए जाने की योजना है और मंजूरी की प्रक्रिया जारी है। यदि सभी प्रस्ताव स्वीकृत होते हैं तो यीडा क्षेत्र उत्तर भारत का प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बन सकता है।

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