
NDMA Conclave 2026: भारत की आपदा तैयारी नई ऊंचाइयों पर, आपदा प्रबंधन कॉन्क्लेव में तकनीकी नवाचारों पर जोर
नई दिल्ली। भारत की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली को पारंपरिक ‘प्रतिक्रियात्मक’ मॉडल से आगे बढ़ाकर ‘प्रोएक्टिव’ और तकनीक-आधारित ढांचे में बदलने के उद्देश्य से आयोजित आपदा प्रबंधन कॉन्क्लेव का वीरवार को समापन हो गया। यह कॉन्क्लेव भारतीय सेना के पश्चिमी कमान मुख्यालय और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सहयोग से चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन में आयोजित किया गया।
कॉन्क्लेव में सैन्य नेतृत्व, एनडीएमए के नीति निर्माता, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधि और शैक्षणिक विशेषज्ञ शामिल हुए। उद्घाटन भाषण एनडीएमए सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने दिया, जबकि मुख्य भाषण राजेंद्र सिंह ने प्रस्तुत किया। पश्चिमी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने भारतीय सेना की आपदा के समय ‘पसंदीदा उत्तरदाता’ की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि सेना का संयुक्त नागरिक और सैन्य तालमेल आपदा प्रबंधन की सफलता के लिए अहम है।
कॉन्क्लेव के सत्रों में सैन्य-नागरिक समन्वय, ‘स्वर्ण घंटा’ के प्रभावी उपयोग और राहत कार्यों के लिए एकीकृत प्रोटोकॉल पर विस्तार से चर्चा की गई। तकनीकी सत्रों में रिमोट सेंसिंग, भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणाली, एआई आधारित आपदा प्रबंधन और शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ से निपटने के नवाचारों पर विशेष प्रस्तुति दी गई। सम्मेलन में उन्नत उपकरणों और स्वदेशी तकनीकों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिससे प्रतिभागियों को नवीनतम तकनीकी साधनों की जानकारी मिली।
कॉन्क्लेव ने 2026 के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम और एकीकृत कमांड संरचना जैसे ठोस कार्य बिंदु तय किए। इस पहल से भारत की आपदा तैयारी को नई दिशा मिली और देश की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन क्षमता को बढ़ावा मिला। विशेषज्ञों ने माना कि इस तरह के सम्मेलन आपदा प्रतिक्रिया में त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय और तकनीक आधारित नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।





