Real estate: रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा देने और जीएसटी राहत की बढ़ी मांग, बजट 2026 से बड़ी उम्मीदें

Real estate: रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा देने और जीएसटी राहत की बढ़ी मांग, बजट 2026 से बड़ी उम्मीदें

नोएडा। देश में रियल एस्टेट सेक्टर की मांग और गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और इसी के साथ केंद्र सरकार से इस सेक्टर को लेकर अपेक्षाएं भी तेज हो गई हैं। हर साल केंद्रीय बजट रियल एस्टेट के लिए दिशा तय करता है और बीते कुछ वर्षों में सरकार के फोकस ने इस क्षेत्र को नई रफ्तार दी है। खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और किफायती आवास योजनाओं ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है, लेकिन इसके बावजूद सेक्टर की कई पुरानी मांगें अब भी पूरी नहीं हो पाई हैं। ऐसे में बजट 2026 को लेकर रियल एस्टेट उद्योग की उम्मीदें पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं।

पिछले बजटों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ाए गए सरकारी खर्च ने रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूत सहारा दिया है। मेट्रो नेटवर्क का विस्तार, नए एक्सप्रेसवे, हाईवे प्रोजेक्ट्स और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े विकास कार्यों ने न सिर्फ मेट्रो शहरों बल्कि टियर-II और टियर-III शहरों में भी रियल एस्टेट गतिविधियों को तेज किया है। बेहतर कनेक्टिविटी के चलते नए रिहायशी और व्यावसायिक इलाके विकसित हुए हैं, जिससे निवेशकों और घर खरीदारों का भरोसा बढ़ा है।

हालांकि, जमीन पर विकास के बावजूद सेक्टर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण सामग्री पर लगने वाली ऊंची जीएसटी दरें डेवलपर्स के लिए अब भी बड़ी चिंता बनी हुई हैं। सितंबर 2025 से लागू GST 2.0 के तहत सीमेंट, पेंट, टाइल्स और वायरिंग जैसी प्रमुख निर्माण सामग्रियों पर जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई, जबकि ईंट, रेत और कुछ पत्थर उत्पादों पर 5 प्रतिशत टैक्स लागू है। इसके बावजूद उद्योग का मानना है कि बढ़ती निर्माण लागत को काबू में करने के लिए जीएसटी दरों में और राहत की जरूरत है, ताकि घरों की कीमतें आम खरीदार की पहुंच में रह सकें।

रियल एस्टेट सेक्टर की एक और बड़ी मांग इसे उद्योग का दर्जा दिए जाने को लेकर है। लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही है कि अगर रियल एस्टेट को औद्योगिक दर्जा मिलता है तो डेवलपर्स को सस्ते कर्ज, बेहतर बैंकिंग सपोर्ट और संस्थागत फंडिंग तक आसान पहुंच मिल सकेगी। इससे न केवल परियोजनाओं की गति तेज होगी बल्कि सेक्टर में पारदर्शिता और स्थिरता भी आएगी। इसके अलावा सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम की कमी के कारण परियोजनाओं की मंजूरी में होने वाली देरी भी आज तक एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं।

बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे ज्यादा उम्मीद अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा में बदलाव को लेकर है। मौजूदा समय में मेट्रो शहरों के लिए 45 लाख रुपये की कीमत सीमा को उद्योग व्यावहारिक नहीं मानता। बढ़ती जमीन और निर्माण लागत के कारण डेवलपर्स का कहना है कि इस सीमा को बढ़ाकर 75 से 85 लाख रुपये किया जाना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा घर किफायती आवास की श्रेणी में आ सकें और मध्यम वर्ग को वास्तविक लाभ मिल सके।

इसके साथ ही होम लोन पर टैक्स छूट बढ़ाने की मांग भी तेज हो गई है। पुरानी और नई दोनों टैक्स रिजीम में ब्याज पर अधिक छूट मिलने से घर खरीदारों को प्रोत्साहन मिलेगा और मांग में और तेजी आ सकती है। वहीं, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन और इको-फ्रेंडली निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बजट में विशेष प्रोत्साहन और सब्सिडी की भी उम्मीद जताई जा रही है। कुल मिलाकर, बजट 2026 को रियल एस्टेट सेक्टर अपने लिए एक अहम मोड़ के रूप में देख रहा है, जिससे न केवल उद्योग बल्कि आम घर खरीदारों को भी सीधा फायदा मिल सकता है।

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