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BIG BREAKING : इंजीनियर युवराज मौत मामला, SIT ने खारिज की पुलिस-प्राधिकरण की रिपोर्ट, 125 अधिकारियों के बयान दर्ज

Noida/Delhi : इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से सौंपी गई रिपोर्टों से असहमति जताई है। एसआईटी ने साफ कर दिया है कि जांच के दौरान दर्ज बयानों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तय की जाएगी।

इसी क्रम में शुक्रवार को एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर करीब 125 लोगों के बयान दर्ज किए। इनमें एसडीआरएफ, फायर विभाग, सिविल और एनटीसी विभाग के जूनियर इंजीनियर, मैनेजर, साइट मैनेजर सहित कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। एसआईटी के सख्त रुख से पुलिस, प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारियों में खलबली मच गई है। माना जा रहा है कि तीनों विभागों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की थी।

सूत्रों के अनुसार एसआईटी बृहस्पतिवार देर शाम प्राधिकरण कार्यालय पहुंची थी, जहां अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और जिलाधिकारी मेधारूपम से पूछताछ की गई। इस दौरान प्राधिकरण, पुलिस और जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्टें जांच टीम को सौंपीं। शुक्रवार को दोबारा पहुंची एसआईटी ने रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद असहमति जताई और स्पष्ट किया कि इन दस्तावेजों में अपने-अपने अधिकारियों को बचाने का प्रयास दिख रहा है।

एसआईटी के सवालों के बाद जिलाधिकारी ने आनन-फानन में संशोधित रिपोर्ट मंगवाई, जबकि पुलिस प्रशासन ने मौके पर ही रिपोर्ट में बदलाव कराया। सिटी मजिस्ट्रेट को भी बुलाया गया। एनटीसी विभाग के बर्खास्त जेई नवीन कुमार, तैनात एसएम विश्वास त्यागी, सिविल विभाग के अधिकारी, वर्क सर्किल दस के प्रभारी प्रवीन सलोनिया, प्रबंधक अरविंद सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। सभी से यह पूछा गया कि सूचना उन्हें किस समय मिली और उसके बाद उन्होंने क्या कदम उठाए।

एसडीआरएफ और फायर विभाग से यह भी पूछा गया कि मौके पर पहुंचने के बाद युवराज की जान बचाने के लिए कौन-कौन से प्रयास किए गए और उन प्रयासों में कहां कमी रह गई। पुलिस से सवाल हुआ कि कुछ दिन पहले हुई ट्रक दुर्घटना के बाद सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। पूछताछ की प्रक्रिया के दौरान ही पुलिस कमिश्नर कार्यालय से रवाना हो गईं। समाचार लिखे जाने तक बयान दर्ज करने का सिलसिला जारी था।

जांच के चलते शुक्रवार को नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में पूरी तरह पब्लिक डीलिंग बंद रही। सभी गेट सील कर दिए गए और किसी के भी अंदर आने-जाने पर रोक लगी रही। जहां एसआईटी बैठी थी, उस क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई और स्वागत कक्ष से ही लोगों को समझाकर वापस भेजा जाता रहा।

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संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

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