Gulf War Impact on Paper Industry: खाड़ी युद्ध से प्रभावित पेपर उद्योग में सरकार से मदद की गुहार
रिपोर्ट: रवि डालमिया
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण युद्ध ने भारत में पेपर उद्योग को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति के मद्देनज़र देश भर के पेपर मिल और पेपर व्यापारियों ने 13 मार्च को दिल्ली के होटल सेवन सीज 12, एम2 रोड, मंगलम प्लेस, रोहिणी सेक्टर-3 में एक अहम संयुक्त बैठक की। बैठक में इंडियन एग्रो रिसाइकल्ड पेपर मिल्स एसोसिएशन (आईएआरपीएमए) और एफपीटीए के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक के मीडिया प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया कि इस बैठक में आईएआरपीएमए के अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल (रामा पेपर मिल), पंकज अग्रवाल (बिंदल पेपर मिल), अमित अग्रवाल (सिल्वर टोन पेपर मिल), संजय खोसला और अन्य प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने चिंता जताई कि युद्ध के कारण पेपर निर्माण में उपयोग होने वाले केमिकल्स की कीमतों में रोज वृद्धि हो रही है और कच्चे माल की कमी से पेपर की कीमतें बढ़ाने की नौबत आ रही है।
प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि युद्ध के कारण भारत में उत्पादित पेपर और पैकेजिंग प्रोडक्ट्स की वियतनाम, दुबई और यूएसए में डिमांड बढ़ गई है, लेकिन इसका लाभ तभी मिल सकता है जब इस ट्रेड से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो। पंकज अग्रवाल ने कहा कि आईएआरपीएमए और एफपीटीए के प्रतिनिधि जल्द ही सरकार के समक्ष अपनी समस्याएं और सुझाव प्रस्तुत करेंगे।
बैठक में पेपर और उससे बने उत्पादों पर लगने वाली जीएसटी दरों की समीक्षा की मांग भी उठी। प्रतिनिधियों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई क्योंकि पेपर उद्योग वर्तमान में कई समस्याओं का सामना कर रहा है।
इस दौरान यह भी तय हुआ कि देश में पेपर उत्पादन पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से नहीं बल्कि 75% रिसाइक्लिंग के माध्यम से होता है। इस भ्रांति को दूर करने के लिए कापी-किताबों के अंतिम पृष्ठ पर चित्रों के जरिए जानकारी देने का निर्णय लिया गया।
दलीप बिंदल ने बताया कि खाड़ी युद्ध के कारण पेपर उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और इस दौर में गरीब वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है जो इस व्यवसाय से अपनी रोजी-रोटी कमाता है। आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में पेपर रिसाइक्लिंग उद्योग से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करोड़ों लोग जुड़े हुए हैं।


