AIIMS Delhi: 1000 से अधिक मरीजों की निशुल्क रोबोटिक सर्जरी कर एम्स ने रचा इतिहास

AIIMS Delhi: 1000 से अधिक मरीजों की निशुल्क रोबोटिक सर्जरी कर एम्स ने रचा इतिहास

नई दिल्ली, 20 जनवरी। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली ने आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 1000 से अधिक मरीजों की निशुल्क रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न कर राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि न केवल एम्स की उन्नत शल्य चिकित्सा क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि अत्याधुनिक और महंगी मानी जाने वाली तकनीक अब आम मरीजों तक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से पहुंच रही है।

एम्स दिल्ली के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील चुंबर ने बताया कि एम्स देश के उन शुरुआती सरकारी संस्थानों में शामिल है, जहां जनरल सर्जरी विभाग में अत्याधुनिक सर्जिकल रोबोट की स्थापना की गई। बीते 13 महीनों में इस तकनीक के माध्यम से 36 से अधिक प्रकार की रोबोटिक सर्जरी की गई हैं। इनमें जटिल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, हेपेटोबिलियरी, ऑन्कोलॉजिकल और ट्रांसप्लांट सर्जरी शामिल हैं। इसके अलावा पैंक्रियाटिक डुओडेनक्टॉमी, गैस्ट्रेक्टॉमी, इसोफेजेक्टॉमी, कोलोरेक्टल कैंसर, जटिल हर्निया, किडनी ट्रांसप्लांट और एंडोक्राइन ट्यूमर से जुड़ी सर्जरी भी रोबोट की सहायता से की जा चुकी हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार रोबोटिक सर्जरी में सबसे अधिक हर्निया के करीब 300, गॉल ब्लैडर स्टोन के लगभग 200 और थायराइड से जुड़े 50 से अधिक मामलों का इलाज किया गया है। ब्रेस्ट और एंडोक्राइन सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. पीयूष रंजन ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से मरीजों को कई लाभ मिलते हैं, जिनमें कम रक्तस्राव, कम दर्द, संक्रमण का कम खतरा, कम समय में अस्पताल से छुट्टी और तेजी से स्वस्थ होना शामिल है। इस तकनीक से सर्जरी अधिक सटीक होती है, जिससे जटिल मामलों में भी बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं।

एम्स प्रशासन के अनुसार करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से यहां दो अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इनमें से एक प्लेटफॉर्म पर सर्जिकल रेजिडेंट्स और युवा डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि दूसरा प्लेटफॉर्म सीधे मरीजों के इलाज में उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में एम्स में 25 से अधिक फैकल्टी सदस्य और बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टर रोबोटिक सर्जरी सेवाओं से जुड़े हुए हैं।

डॉ. सुनील चुंबर ने उम्मीद जताई कि आने वाले पांच वर्षों में रोबोटिक सर्जरी देश के लगभग हर बड़े अस्पताल में उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इस तकनीक की मांग बढ़ रही है, उससे यह स्पष्ट है कि भविष्य में रोबोटिक सर्जरी भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली का एक अहम हिस्सा बन जाएगी और आम लोगों को विश्वस्तरीय इलाज सुलभ हो सकेगा।

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