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Noida: 20 मोबाइल बरामद, दो शातिर स्नेचर गिरफ्तार, एक बाल अपराधी भी दबोचा

Noida: 20 मोबाइल बरामद, दो शातिर स्नेचर गिरफ्तार, एक बाल अपराधी भी दबोचा

नोएडा। ई-रिक्शा में बैठी सवारियों और राहगीरों से मोबाइल झपटकर फरार होने वाले बाइक सवार तीन बदमाशों को सेक्टर-39 थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में दो शातिर अपराधी और एक नाबालिग शामिल है। पुलिस ने इनके कब्जे से लूट और चोरी के 20 मोबाइल फोन, वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक, एक तमंचा, कारतूस और दो हजार रुपये की नकदी बरामद की है।

एसीपी प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि शनिवार देर रात बोटेनिकल मेट्रो स्टेशन के सामने संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि सेक्टर-39 थाना क्षेत्र में मल्टीलेवल पार्किंग के पीछे तीन युवक बाइक के साथ खड़े हैं और लूटे गए मोबाइल बेचने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को देखते ही तीनों बाइक लेकर भागने लगे, लेकिन पीछा कर उन्हें दबोच लिया गया।

पूछताछ में आरोपियों की पहचान सदरपुर की खजूर कॉलोनी निवासी अर्जुन कुमार और सेक्टर-128 के सुल्तानपुर गांव निवासी रोबिन त्यागी के रूप में हुई, जबकि तीसरा आरोपी नाबालिग है, जो छलेरा गांव का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार अर्जुन की उम्र 22 वर्ष और रोबिन की उम्र 28 वर्ष है। दोनों का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है।

पुलिस जांच में सामने आया कि बरामद मोबाइल शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से लूटे गए थे। आरोपियों ने बताया कि लूट का विरोध करने पर लोगों को डराने के लिए वे तमंचा रखते थे और कई बार राहगीरों को धक्का देकर घायल भी कर देते थे। लूटे गए मोबाइल बेचकर उन्होंने करीब दो हजार रुपये की नकदी जुटाई थी, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है।

राहगीरों और कबाड़ियों को सस्ते दाम पर बेचते थे मोबाइल

पूछताछ में अर्जुन ने बताया कि लूटे गए मोबाइल बेचने की जिम्मेदारी नाबालिग की होती थी। वह राहगीरों और खासतौर पर कबाड़ियों को चोरी और लूट के मोबाइल बेचता था। जिन मोबाइल की बाजार कीमत करीब 50 हजार रुपये होती थी, उन्हें महज छह हजार रुपये में बेच दिया जाता था। मोबाइल बेचते समय आरोपी लोगों को यह कहकर भावुक कर देते थे कि परिवार में कोई बीमार है और इलाज के लिए पैसे की जरूरत है।

नंबर प्लेट बदलकर करते थे वारदात

तीनों आरोपियों ने मोबाइल स्नैचिंग को ही अपना पेशा बना लिया था। वे वारदात के समय बाइक की नंबर प्लेट बदल लेते थे और घटना के बाद असली नंबर प्लेट फिर से लगा देते थे। बाइक आरोपी अर्जुन के मामा की बताई जा रही है। गिरोह का कोई एक सदस्य बीच या पीछे बैठकर मोबाइल झपटता था, जबकि दूसरा बाइक चलाता था।

पुलिस के मुताबिक आरोपी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं और महज पांचवीं तक पढ़ाई की है। अर्जुन पहले भी जेल जा चुका है। वह मूल रूप से अलीगढ़ का रहने वाला है और करीब तीन साल पहले नौकरी की तलाश में नोएडा आया था, लेकिन बाद में अपराध की राह पर चल पड़ा। पुलिस ने आरोपियों के परिजनों को उनके अपराधों की जानकारी दे दी है। पूछताछ में दो अन्य साथियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों को तमंचा कहां से मिला।

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