Youth Lifestyle: भारतीय समाज की बदलती तस्वीर, संयुक्त और एकल परिवारों के बाद बढ़ रहे व्यक्तिवादी परिवार

Youth Lifestyle: भारतीय समाज की बदलती तस्वीर, संयुक्त और एकल परिवारों के बाद बढ़ रहे व्यक्तिवादी परिवार
नई दिल्ली,भारतीय समाज में परिवार की संरचना धीरे-धीरे बदल रही है। संयुक्त परिवार और बाद में न्यूक्लियर परिवार के चलन के बाद अब व्यक्तिवादी परिवारों यानी इंडिविजुअल फैमिली की ओर झुकाव तेजी से बढ़ रहा है। अक्सर युवाओं में दिखाई देने वाला ‘आई, मी और मायसेल्फ’ रवैया इस बदलाव का प्रमुख कारण बन रहा है।
आज के युवा अकेले रहना पसंद कर रहे हैं। वे न केवल शादी-ब्याह के परंपरागत रास्तों को अपनाने से बचते हैं, बल्कि किसी साथी के साथ प्रतिबद्ध या कमिटेड होने से भी दूरी बनाए रखते हैं। उनका व्यवहार अक्सर ‘मैं, मुझे, खुद’ जैसे दृष्टिकोण से जुड़ा होता है। यह रवैया कभी-कभी दूसरों के प्रति सम्मान की कमी या नकारात्मकता के रूप में दिखाई देता है, जबकि कभी यह आत्म-सम्मान और व्यक्तिगत सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ा होता है।
युवा इसे अपने रिश्तों में सीमाएं तय करने और अपनी भलाई का समझौता न करने का तरीका मानते हैं। वे ऐसे रिश्तों को प्राथमिकता देते हैं, जहां उनकी कद्र हो और किसी को खुश करने के लिए अपनी खुद की सीमाओं को बाधित न करना पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव समाज में स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की पहचान है, लेकिन पारंपरिक सामाजिक मूल्यों और आपसी रिश्तों पर भी असर डाल सकता है।
इस तरह, व्यक्तिवादी परिवारों का बढ़ता चलन यह दर्शाता है कि भारतीय समाज में व्यक्तिगत आज़ादी और व्यक्तिगत पहचान की बढ़ती मांग के साथ-साथ परिवारिक संरचना में भी बदलाव आ रहा है। यह रुझान नई पीढ़ी की सोच और जीवनशैली का प्रतिबिंब है।
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