Dr Rajesh Sagar: बचपन में उत्पीड़न 50% मानसिक रोगों की वजह: विशेषज्ञ

Dr Rajesh Sagar: बचपन में उत्पीड़न 50% मानसिक रोगों की वजह: विशेषज्ञ

नई दिल्ली। एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश सागर के अनुसार वयस्कों में होने वाले 50% मानसिक रोगों की जड़ बचपन और किशोरावस्था में हुई मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न में है। 0-14 वर्ष की आयु में बच्चे सामाजिक और भावनात्मक कौशल सीखते हैं, जो उनके भविष्य के मानसिक स्वास्थ्य को आकार देते हैं। यदि इस दौरान बच्चों को घर, स्कूल या डिजिटल माध्यम से नकारात्मक अनुभव जैसे मारपीट, बुलिंग, माता-पिता के तनाव, हिंसा आदि का सामना करना पड़े तो उनके मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर पड़ता है।

डॉ. सागर ने बताया कि बचपन में दुर्व्यवहार से बच्चों में अवसाद, चिंता, मोटापा, आत्मविश्वास की कमी, आक्रामकता और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। विषाक्त तनाव प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर हृदय रोग, अस्थमा और अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

अध्ययन के अनुसार भारत में 8% बच्चे और 15% किशोर मानसिक विकार से पीड़ित हैं, लेकिन 90% मामलों में चिकित्सकीय मदद नहीं ली जाती। विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों को पॉजिटिव और सुरक्षित वातावरण देना चाहिए, उनकी समस्याओं को गोपनीय रखना चाहिए और मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बच्चों के साथ रोजाना कम से कम 30-40 मिनट समय बिताना, गेम्स खेलना, कहानियां पढ़ना और आउटडोर गतिविधियों में शामिल करना लाभकारी है।

बचपन के दुर्व्यवहार के लक्षण

  • दोस्तों और सामान्य गतिविधियों से दूरी बनाना
  • आक्रामकता, गुस्सा, शत्रुता या अतिसक्रियता बढ़ना
  • अवसाद, चिंता या असामान्य भय
  • आत्मविश्वास में कमी, नींद न आना, बुरे सपने देखना

स्कूल में बच्चे अधिक समय बिताते हैं और शिक्षक उनके व्यवहार पर निगरानी रख सकते हैं। शिक्षक मानसिक बदलाव और लक्षणों को सबसे पहले पहचान सकते हैं और अभिभावकों को मदद दिला सकते हैं।

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