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नई दिल्ली: इनडोर हवा होगी और साफ, एयर फिल्टर का खर्च होगा कम

नई दिल्ली: -आईआईटी दिल्ली ने विकसित की स्मार्ट एचवीएसी फिल्टर बनाने की तकनीक

नई दिल्ली, 30 सितम्बर : कोविड-19 महामारी ने दुनिया को सिखाया कि स्वस्थ इनडोर हवा कितनी जरूरी है। खासकर स्कूल, अस्पताल और ऑफिस जैसी जगहों पर जहां उचित वेंटिलेशन सिस्टम न होने के चलते स्वस्थ इनडोर हवा का अभाव बना रहता है। इस समस्या के समाधान के लिए आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा मशीन लर्निंग फ्रेमवर्क विकसित किया है, जो स्मार्ट एचवीएसी फिल्टर को स्मार्ट तरीके से डिजाइन करने में मदद करेगा।

आईआईटी दिल्ली के टेक्सटाइल एंड फाइबर इंजीनियरिंग विभाग के प्रो अमित रावल ने बताया कि यह फ्रेमवर्क दुनियाभर के अध्ययनों से जुटाए गए डाटा पर आधारित है। यह मशीन लर्निंग मॉडल भविष्यवाणी कर सकता है कि कोई फिल्टर हवा को कितनी सफाई से पार करेगा और साथ ही वायु प्रवाह को कितनी आसानी से गुजरने देगा। इस सिस्टम को एलॉफिक इंडस्ट्रीज लिमिटेड के इंडस्ट्रियल डाटा से टेस्ट किया गया और नतीजे उत्साहजनक पाए गए। इससे घर, दफ्तर, अस्पताल में मौजूद एयर फिल्टर की गुणवत्ता में इजाफा होगा। साथ ही ऊर्जा पर होने वाला खर्च कम होगा।

अमित रावल ने कहा, परंपरागत एयर फिल्टर जितना ज्यादा धूल और हानिकारक कण रोकते हैं, उतना ही वे हवा के प्रवाह को बाधित कर देते हैं, जिससे ऊर्जा की खपत बढ़ जाती है। लेकिन एचवीएसी की मदद से हम बेहतर इनडोर वातावरण निर्मित करने के साथ, कम ऊर्जा खर्च और भविष्य की स्वास्थ्य आपदाओं से लड़ने की तैयारी भी कर सकते हैं। हमारा लक्ष्य है कि स्कूलों, अस्पतालों, कार्यस्थलों और घरों में साफ और स्वस्थ हवा हर किसी को उपलब्ध हो। यह रिसर्च जर्नल सेपरेशन एंड प्यूरिफिकेशन टेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुई है। इसमें आईआईटी दिल्ली, यूनिवर्सिटी ऑफ़ बोरस, केटीएच रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एनआईटी रायपुर, बेनेट यूनिवर्सिटी और एलॉफिक इंडस्ट्रीज लिमिटेड के विशेषज्ञ शामिल रहे।

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