Obesity Surgery: 275 किलो के किशोर की जटिल सर्जरी, दो महीने में 50 किलो वजन हुआ कम
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के 16 वर्षीय किशोर का वजन 275 किलो और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) करीब 100 तक पहुंचने के बाद उसकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। सांस लेने में परेशानी, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया और शरीर में व्यापक त्वचा संक्रमण के कारण उसे सामान्य कार से अस्पताल लाना भी संभव नहीं था। परिजन उसे मैटाडोर के जरिए सर गंगाराम अस्पताल लेकर पहुंचे।
डॉक्टरों के मुताबिक, किशोर की हालत को देखते हुए उसे करीब दो सप्ताह तक पीडियाट्रिक आईसीयू में रखकर स्थिर किया गया। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने जटिल लैप्रोस्कोपिक स्लीव गेस्ट्रोक्टॉमी करने का फैसला लिया। सर्जरी के करीब दो महीने बाद किशोर का वजन घटकर 223 किलो रह गया है। यानी उसके वजन में लगभग 50 किलो की कमी आई है।
अत्यधिक मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को देखते हुए करीब 20 विशेषज्ञों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने सर्जरी से पहले किशोर का विस्तृत मूल्यांकन किया। इसमें पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर, बैरिएट्रिक सर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, कार्डियोलॉजी और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ शामिल थे।
डॉक्टरों ने सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया देने, मरीज की पोजिशनिंग, लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया और ऑपरेशन के बाद सांस से जुड़ी संभावित जटिलताओं का विशेष रूप से आकलन किया। अत्यधिक वजन के कारण सर्जरी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण थी।
डॉ. दक्ष सेठी, डॉ. सुधीर कल्हान, डॉ. मुकुंद खेतान और डॉ. सुविराज जॉन की टीम ने इन चुनौतियों के बीच स्लीव गेस्ट्रोक्टॉमी सफलतापूर्वक पूरी की। सर्जरी के तीन दिन बाद किशोर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों के अनुसार, इलाज का उद्देश्य केवल किशोर का वजन कम करना नहीं है। इसके साथ ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, हृदय संबंधी जोखिम और मेटाबॉलिक समस्याओं को कम करना तथा उसकी गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना भी लक्ष्य है। सर्जरी के बाद किशोर की नियमित मल्टीडिसिप्लिनरी निगरानी की जा रही है।


