Yuvraj Mehta death case: युवराज मौत मामला: लोटस ग्रीन के मालिक निर्मल सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट, पुलिस ने पहले ही सील किया था कार्यालय

Yuvraj Mehta death case: युवराज मौत मामला: लोटस ग्रीन के मालिक निर्मल सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट, पुलिस ने पहले ही सील किया था कार्यालय
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कार्रवाई भी सख्त होती जा रही है। इस प्रकरण में लोटस ग्रीन बिल्डर के मालिक निर्मल सिंह के खिलाफ अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। इससे पहले पुलिस निर्मल सिंह के कार्यालय को सील कर चुकी है, जिससे साफ है कि जांच एजेंसियां अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले में अब तक तीन बिल्डरों को गिरफ्तार किया जा चुका है और पूछताछ जारी है। गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद निर्मल सिंह की गिरफ्तारी के प्रयास और तेज कर दिए गए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर कानून के दायरे में लाया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है और बिल्डर लॉबी में भी हलचल मची हुई है।
इस बीच गुरुवार शाम विशेष जांच दल नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित कार्यालय पहुंचा। एसआईटी के सामने नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मामले से जुड़े तमाम सवालों के जवाब पेश किए। नोएडा प्राधिकरण की ओर से करीब 60 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर एसआईटी को सौंपी गई, जबकि जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन से संबंधित अपनी अलग रिपोर्ट पेश की। लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में एसआईटी ने अधिकारियों से कई अहम बिंदुओं पर जानकारी हासिल की।
हालांकि देर शाम तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है या नहीं। सूत्रों के अनुसार जांच दल इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि युवराज की कार बेसमेंट में डूबने के बाद करीब दो घंटे तक प्रभावी रेस्क्यू क्यों नहीं किया जा सका। यह भी जांच का अहम बिंदु है कि जिस इलाके में जलभराव था, क्या उसे पहले से संवेदनशील या खतरनाक क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया था। यदि ऐसा था तो वहां समय रहते चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या अन्य सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए।
एसआईटी यह भी परख रही है कि निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और संबंधित विभागों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई या नहीं। युवराज मेहता की मौत के बाद यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और बिल्डरों की मनमानी का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। अब लोगों की नजरें इस पर टिकी हैं कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकेगा।
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