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World Liver Day Alert: हर 4 में से 1 डायबिटीज मरीज में लिवर फाइब्रोसिस, बढ़ता ‘साइलेंट’ खतरा

World Liver Day Alert: हर 4 में से 1 डायबिटीज मरीज में लिवर फाइब्रोसिस, बढ़ता ‘साइलेंट’ खतरा

नई दिल्ली, 19 अप्रैल: विश्व लिवर दिवस के मौके पर सामने आए नए आंकड़ों ने भारत में लिवर बीमारियों की गंभीर स्थिति को उजागर कर दिया है। राजधानी के AIIMS Delhi के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से ‘मौन खतरे’ के रूप में फैल रही हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक 14 प्रतिशत मरीजों में उन्नत लिवर फाइब्रोसिस, 5 प्रतिशत में संभावित सिरोसिस और 13 प्रतिशत मरीजों में बिना फैटी लिवर के भी गंभीर फाइब्रोसिस के मामले सामने आए हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि खराब जीवनशैली, बढ़ता मोटापा और तेजी से फैल रही डायबिटीज इस संकट के प्रमुख कारण बन चुके हैं। भारत में लिवर रोग हर साल 20 लाख से अधिक मौतों का कारण बन रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि लिवर की अधिकांश बीमारियां शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती हैं, जिससे समय पर पहचान नहीं हो पाती और स्थिति गंभीर हो जाती है।

एम्स दिल्ली के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. शालीमार ने बताया कि लिवर शरीर का ‘ड्राइवर’ है, जो खून को साफ करने, भोजन को पचाने और पोषक तत्वों को संग्रहित करने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। उन्होंने कहा कि जंक फूड, अनियमित खान-पान, शराब का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी लिवर को तेजी से नुकसान पहुंचा रही है। ऐसे में नियमित जांच ही इस ‘साइलेंट’ खतरे को समय रहते पहचानने का सबसे प्रभावी तरीका है।

डायबिटीज और लिवर के बीच खतरनाक संबंध भी इस रिपोर्ट में सामने आया है। The Lancet में प्रकाशित ‘डायफाइब-लिवर स्टडी 2026’ के अनुसार देश में टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हर 4 में से 1 व्यक्ति, यानी लगभग 26 प्रतिशत लोग, गंभीर लिवर फाइब्रोसिस से जूझ रहे हैं। वहीं हर 20 में से 1 मरीज में संभावित सिरोसिस पाया गया, जो अक्सर बिना लक्षण के विकसित होता है। इस अध्ययन में लिवर फाइब्रोसिस को टाइप-2 डायबिटीज की ‘चौथी प्रमुख जटिलता’ के रूप में पहचाना गया है। शोध के अनुसार मोटापा, लंबे समय से डायबिटीज और मेटाबॉलिक सिंड्रोम इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं।

डॉक्टरों के अनुसार आधुनिक जांच तकनीकों की मदद से इस खतरे को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सकता है। लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) में एएलटी, एएसटी, बिलीरुबिन और एल्ब्युमिन जैसे पैरामीटर लिवर की स्थिति का संकेत देते हैं। इसके अलावा पीटी और जीजीटी टेस्ट से गंभीर क्षति और शराब के प्रभाव का पता चलता है। अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन (वीसीटीई) जैसी उन्नत तकनीकों के जरिए लिवर की खराबी का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाना संभव है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लिवर रोगों से बचाव पूरी तरह संभव है, यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार किया जाए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, शराब से दूरी और समय-समय पर हेल्थ चेकअप बेहद जरूरी हैं। डॉक्टरों के मुताबिक केवल 5 से 10 प्रतिशत वजन कम करने से ही कई मामलों में लिवर फाइब्रोसिस को शुरुआती चरण में नियंत्रित या सुधारा जा सकता है।

विश्व लिवर दिवस पर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे इस ‘साइलेंट किलर’ को हल्के में न लें और समय रहते जांच व जागरूकता के जरिए खुद को सुरक्षित रखें।

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