भारत

Winter health care tips: मौसम हुआ बेईमान, सेहत पर बढ़ा खतरा, खान-पान और दिनचर्या में सावधानी बेहद जरूरी

Winter health care tips: मौसम हुआ बेईमान, सेहत पर बढ़ा खतरा, खान-पान और दिनचर्या में सावधानी बेहद जरूरी

नई दिल्ली, 28 जनवरी। सर्दी के मौसम में लगातार गिरते तापमान, शुष्क हवा और कभी-कभी हो रही बारिश ने एक ओर जहां प्रदूषण के स्तर में कुछ राहत दी है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में तेजी से इजाफा भी किया है। अस्पतालों में सर्दी-जुकाम, फ्लू, सांस और जोड़ों से जुड़ी शिकायतों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। बदलते मौसम ने लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर सीधा असर डाला है, जिससे छोटी-छोटी लापरवाहियां भी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एएमएस और स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार के अनुसार ठंड के मौसम में खान-पान और जीवनशैली में आए बदलाव बीमारियों की बड़ी वजह बन रहे हैं। सर्दियों में घी-तेल से बने तले-भुने खाद्य पदार्थों जैसे समोसे, कचौड़ी, पकौड़ी और मिठाइयों का सेवन बढ़ जाता है, जबकि शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। इसके साथ ही वातावरण में नमी और ठंड के कारण वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जो भीड़-भाड़ वाली जगहों पर तेजी से संक्रमण फैलाते हैं। कम तापमान और शुष्क हवा के कारण कई लोगों की इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है, जिससे सर्दी-जुकाम, फ्लू, गले में खराश, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा का बढ़ना, निमोनिया, जोड़ों का दर्द, त्वचा का रूखापन और हृदय संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में लंबे समय तक बिस्तर पर बैठे-बैठे तला-भुना भोजन, रेवड़ी-गजक और हलवा जैसे मीठे पदार्थों का अधिक सेवन करने से खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है। इससे रक्त गाढ़ा हो सकता है और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्या का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा ठंड से बचने के लिए आग जलाकर ताप लेना भी कई बार जानलेवा साबित हो सकता है। पुराने टायर, प्लास्टिक या सनमाइका जैसी चीजें जलाने से जहरीले केमिकल निकलते हैं, जो हवा में घुलकर सांस संबंधी बीमारियों को जन्म देते हैं।

कमरे को गर्म रखने के लिए अंगीठी का उपयोग करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बंद कमरे में अंगीठी जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है, जो बेहद खतरनाक होती है और कई मामलों में जान भी ले सकती है। इसलिए यदि अंगीठी का इस्तेमाल किया जाए तो वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था रखना अनिवार्य है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी जनित रोगों से बचाव के लिए खान-पान और दिनचर्या में छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव जरूरी हैं। तले-भुने और अत्यधिक मीठे भोजन की जगह संतुलित और पौष्टिक आहार को प्राथमिकता दें। अचानक तापमान में बदलाव से बचें और गर्म वातावरण से सीधे ठंडे माहौल में जाने से परहेज करें। घर को गर्म रखने के लिए पर्दों और गलीचों का उपयोग करें, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए। ठंड से बचाव के लिए सिर, कान और गले को ऊनी कपड़ों से ढककर रखें और टोपी-मोजों का नियमित उपयोग करें।

गुनगुना पानी पीना, अदरक-तुलसी की चाय, हल्दी वाला दूध और मौसमी फल-सब्जियों का सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार साबित होता है। अच्छी नींद लेना, घर को पर्याप्त रूप से गर्म रखना और रोजाना थोड़ी शारीरिक कसरत या योग करना भी शरीर में गर्मी बनाए रखने और इम्युनिटी मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है। मौसम की इस “बेईमानी” में सतर्कता और सही दिनचर्या ही स्वस्थ रहने का सबसे बड़ा मंत्र है।

Related Articles

Back to top button