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उत्तर प्रदेश : हापुड़ में बंदरों का हमला, 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से घायल, CCTV में कैद घटना

Hapur News : हापुड़ शहर में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है और अब यह समस्या लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। ताजा घटना पंजाबी कॉलोनी की है, जहां बंदरों के झुंड ने 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।

शनिवार सुबह जमुना देवी अपने घर के बाहर टहल रही थीं। जब वह कॉलोनी के पार्क के पास पहुंचीं, तभी अचानक बंदरों का एक बड़ा झुंड उन्हें घेर लिया। इससे पहले कि वह कुछ समझ पातीं, बंदरों ने उनके पैर पर हमला कर दिया और उन्हें खींचकर गिरा दिया। इस हमले में उनके पैर और शरीर पर गहरे जख्म हो गए।

महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह बंदरों को भगाया। इसके बाद घायल अवस्था में उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। परिजनों और पड़ोसियों के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन चोटें गहरी हैं और उन्हें काफी दर्द हो रहा है।

पंजाबी कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि इलाके में बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक अब बेकाबू हो चुका है। बंदरों के झुंड सड़कों, पार्कों और घरों के आसपास घूमते रहते हैं, लोगों से खाना छीनते हैं और कई बार हमला भी कर देते हैं। इससे सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और बुजुर्गों को है, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कई बार आवारा कुत्ते भी बंदरों के साथ मिलकर लोगों को घेर लेते हैं और उन पर भौंकते या हमला करने की कोशिश करते हैं। इस स्थिति ने पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर दिया है।

निवासियों ने बताया कि 25 मार्च को उन्होंने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को लिखित शिकायत भी दी थी, जिसमें बंदरों और कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की गई थी। शिकायत में कहा गया था कि बच्चों का खेलना और बुजुर्गों का टहलना तक मुश्किल हो गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

अब लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए और आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए स्टरलाइजेशन जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार शहरों में बंदरों की बढ़ती संख्या का कारण कचरा प्रबंधन की कमी, खुले में भोजन की उपलब्धता और प्राकृतिक आवास का घटता क्षेत्र है। उनका मानना है कि समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने जरूरी हैं, जैसे स्टरलाइजेशन, रिलोकेशन और लोगों में जागरूकता अभियान चलाना।

इस घटना के बाद पूरे हापुड़ में चर्चा तेज हो गई है और लोग प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

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संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

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