उत्तर प्रदेश : ब्रज तीर्थ विकास परिषद के संरक्षण में संवर रही जोधपुर झाल, 1493 जलीय पक्षी मिले

Mathura News : उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा विकसित जोधपुर झाल वेटलैंड पर एशियन वॉटरबर्ड सेंसस–2026 के अंतर्गत रविवार को जलीय पक्षियों की गणना की गई। लगातार छठे वर्ष हुई इस गणना में अब तक की सर्वाधिक 72 प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें 11 आईयूसीएन सूची में शामिल संकटग्रस्त प्रजातियां भी पाई गईं। कुल 1493 जलीय पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे वेटलैंड की जैव विविधता में निरंतर सुधार के संकेत मिले हैं।
आगरा मंडल के चार वेटलैंड्स में जलीय पक्षियों की गणना की शुरुआत फरह क्षेत्र स्थित जोधपुर झाल से की गई। यह गणना वेटलैंड्स इंटरनेशनल के उत्तर प्रदेश कोऑर्डिनेटर नीरज श्रीवास्तव के निर्देशन तथा बीआरडीएस के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. के. पी. सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुई। गणना में डॉ. अमोल शिरोमणी, पलक गुप्ता, निधि यादव, अनुज यादव, अनुज परिहार, आकांक्षा, डॉ. राहुल गुप्ता, अदनान, अमित दिवाकर, विनोद, अनुराग पचैरा, उदय, बलवंत और जीतू सहित विशेषज्ञों ने सहयोग किया। इस कार्यक्रम में बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और वन विभाग मथुरा का सहयोग रहा।
एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के अंतर्गत दो समूहों के आठ विशेषज्ञ सदस्यों ने लगभग तीन घंटे में 80 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गणना की। इसमें 72 प्रजातियों की पहचान की गई, जिनमें 32 प्रवासी और 40 स्थानीय प्रजातियां शामिल रहीं। जोधपुर झाल का विकास उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा कराया गया है, जबकि इसकी देखरेख वन विभाग द्वारा की जा रही है।
गणना के दौरान सबसे अधिक संख्या बार-हेडेड गूज की पाई गई, जिनकी संख्या 387 रही। इसके अलावा नॉर्दर्न पिनटेल 249 और कॉमन टील 184 की संख्या में दर्ज किए गए। साथ ही गेडवाल, यूरेशियन विजन, नॉर्दर्न शोवलर, पाइड एवोसेट, लिटिल स्टिंट, टेमिनिक स्टिंट, सैंडपाइपर, वैगटेल, ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट, पर्पल स्वैम्प हेन और कॉमन स्नाइप जैसी प्रजातियां भी रिकॉर्ड की गईं।
इस गणना की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि पहली बार जोधपुर झाल वेटलैंड पर 11 संकटग्रस्त प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें सारस क्रेन, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, पेंटेड स्टॉर्क, ओरिएंटल डार्टर, कॉमन पोचार्ड, वूली-नेक्ड स्टॉर्क, ब्लैक-टेल्ड गोडविट, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, रिवर टर्न, फेरुजिनस पोचार्ड और ब्लैक-हेडेड आइबिस शामिल हैं।
आगरा वृत्त के मुख्य वन संरक्षक अनिल पटेल ने बताया कि वन विभाग की निरंतर निगरानी और सुरक्षा के कारण प्रवासी पक्षियों पर मंडराने वाला खतरा कम हुआ है, जिससे उनकी संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। वहीं पक्षी विशेषज्ञ डॉ. के. पी. सिंह ने बताया कि जोधपुर झाल वेटलैंड पर नमभूमि के क्षेत्रफल का विस्तार कर नए जलीय आवास विकसित किए गए हैं। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा है कि वेटलैंड पर निर्भर पक्षियों की प्रजातियों और संख्या दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।





