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उत्तर प्रदेश : चश्मदीदों के बयानों से उलझी इंजीनियर की मौत की जांच, आठ घंटे की पूछताछ के बाद भी सवाल बरकरार

Noida News : युवराज मेहता की मौत की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने प्राधिकरण, पुलिस और प्रशासन का पक्ष सुनने के बाद शनिवार को चश्मदीदों के बयान दर्ज किए। घटना का मुख्य चश्मदीद मुनेंद्र अपने पिता और भाई नरेंद्र के साथ दोपहर करीब ढाई बजे प्राधिकरण कार्यालय पहुंचा। उसने एसआइटी से कहा कि वह दबाव में आकर अपना बयान नहीं बदलेगा और जो कुछ उसने देखा है वही सच बताएगा। मुनेंद्र ने घटना स्थल के हालात और बचाव दल के प्रयासों की जानकारी एसआइटी को दी। सूत्रों के अनुसार चश्मदीदों के बयान अधिकारिक दावों से टकराते नजर आए हैं। इससे प्राधिकरण, एसडीआरएफ, दमकल विभाग और पुलिस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुनेंद्र ने पुलिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उसके पारिवारिक विवाद को रंजिश का आधार बनाकर उस पर दबाव बनाया जा रहा है।

करीब आठ घंटे तक जांच अधिकारियों ने चश्मदीदों से आक्रामक लहजे में पूछताछ की। वहीं नोएडा प्राधिकरण और पुलिस ने अपनी अपनी विस्तृत रिपोर्ट एसआइटी को सौंप दी है। प्राधिकरण की रिपोर्ट करीब 150 पन्नों की है जबकि पुलिस की रिपोर्ट 450 पन्नों तक पहुंच गई है। इनमें घटनाक्रम, कार्रवाई, ड्यूटी रोस्टर, कंट्रोल रूम रिकार्ड, कॉल डिटेल, रिस्पांस टाइम और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका का विवरण शामिल होने का दावा किया गया है। भारी भरकम फाइलों के बावजूद जमीनी सवाल अब भी जस के तस बने हुए हैं। युवराज को दो घंटे तक बाहर क्यों नहीं निकाला जा सका, मौके पर रेस्क्यू में देरी किस स्तर पर हुई और कंट्रोल रूम तथा फील्ड टीम के बीच तालमेल क्यों टूटा, इन अहम सवालों पर रिपोर्ट में स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने से बचने की कोशिश नजर आ रही है।

एसआइटी अब इन रिपोर्टों का बारीकी से विश्लेषण कर रविवार शाम तक लखनऊ में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार यदि रिपोर्ट में गोलमोल जवाब और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश सामने आई तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। जांच टीम का मुख्य फोकस उस भूखंड के आवंटन पर भी है जहां हादसा हुआ। एसआइटी यह जानना चाहती है कि भूखंड किसे, क्यों और किन शर्तों पर आवंटित किया गया, निर्माण से पहले सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं हुई और खतरनाक स्थिति बनने के बावजूद समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया गया। इसके साथ ही एसआइटी ने यह भी पूछा कि भूखंड में पानी कब भरना शुरू हुआ और इसकी जानकारी सबसे पहले किस अधिकारी को थी। जांच टीम का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और पूरे सिस्टम की बड़ी चूक का प्रतीक बन चुका है।

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