Southern Command Readiness: दक्षिणी कमान की तैयारियों की थल सेना प्रमुख ने परखी ताकत, ऑपरेशनल रेडीनेस और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर
नई दिल्ली/पुणे, 31 अगस्त। थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सोमवार को पुणे स्थित दक्षिणी कमान मुख्यालय का दौरा कर सेना की ऑपरेशनल तैयारियों और युद्धक क्षमता की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने बदलते युद्ध स्वरूप और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तकनीक को तेजी से अपनाने, यथार्थवादी प्रशिक्षण, तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।
दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने थल सेना प्रमुख को कमान की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, प्रशिक्षण गतिविधियों और मिशन रेडीनेस के बारे में जानकारी दी। उन्हें दक्षिणी कमान की परिचालन तैयारियों और विभिन्न परिस्थितियों में सैन्य प्रतिक्रिया की क्षमता से भी अवगत कराया गया।
थल सेना प्रमुख ने कमान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बदलते युद्ध स्वरूप के अनुरूप आधुनिक तकनीकों को तेजी से सैन्य क्षमताओं का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
जनरल सेठ ने कहा कि आधुनिक युद्ध में केवल पारंपरिक सैन्य क्षमताएं पर्याप्त नहीं हैं। बदलती परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी क्षमता, प्रशिक्षण और तेजी से प्रतिक्रिया देने की योग्यता को लगातार मजबूत करना आवश्यक है।
उन्होंने जवानों के प्रशिक्षण को अधिक यथार्थवादी बनाने पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य सैनिकों को ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार रखना है, जिनका सामना उन्हें वास्तविक ऑपरेशनल वातावरण में करना पड़ सकता है।
थल सेना प्रमुख ने मिशन रेडीनेस की समीक्षा करते हुए जवानों से हर परिस्थिति में अभियान के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिचालन तैयारी को लगातार उच्च स्तर पर बनाए रखना सेना की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
समीक्षा के दौरान संयुक्तता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। आधुनिक सैन्य अभियानों में विभिन्न सेनाओं और सैन्य क्षमताओं के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी दिशा में प्रशिक्षण और ऑपरेशनल योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
जनरल सेठ ने स्वदेशी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की। सेना में स्वदेशी तकनीक और उपकरणों को शामिल करने की प्रक्रिया को देश की दीर्घकालिक रक्षा तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दक्षिणी कमान की समीक्षा के दौरान प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता को भविष्य की ऑपरेशनल जरूरतों से जोड़ने पर चर्चा हुई। थल सेना प्रमुख ने सैन्य इकाइयों को बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के अनुरूप अपनी तैयारियों को लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने जवानों की पेशेवर क्षमता और युद्ध कौशल को मजबूत करने के लिए नियमित और वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित प्रशिक्षण को आवश्यक बताया। ऐसे प्रशिक्षण का उद्देश्य किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में तेजी से और प्रभावी सैन्य प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।
दौरे के दौरान थल सेना प्रमुख ने पूर्व सैनिकों के योगदान को भी सम्मानित किया। जनरल सेठ ने पूर्व सैनिकों को ‘योद्धा सेवा सम्मान’ प्रदान कर राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा में उनके योगदान की सराहना की।
उन्होंने पूर्व सैनिकों की भूमिका को सैन्य सेवा के बाद भी महत्वपूर्ण बताते हुए उनके अनुभव और समाज के प्रति योगदान को सम्मान दिया। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में सेवा दे रहे पूर्व सैनिकों के कार्यों की प्रशंसा की गई।
पुणे स्थित दक्षिणी कमान मुख्यालय का यह दौरा सेना की ऑपरेशनल रेडीनेस, प्रशिक्षण, तकनीकी आधुनिकीकरण और युद्धक क्षमताओं की समीक्षा पर केंद्रित रहा। थल सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि बदलते युद्ध स्वरूप के बीच तकनीक, स्वदेशीकरण और संयुक्तता को सैन्य तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
समीक्षा के दौरान मिशन के लिए हर समय तैयार रहने का संदेश देते हुए जनरल सेठ ने दक्षिणी कमान को अपनी परिचालन और युद्धक क्षमताओं को लगातार मजबूत करने पर जोर दिया। भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए तकनीकी क्षमता और यथार्थवादी प्रशिक्षण को सेना की तैयारियों के केंद्र में रखने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।


