Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक को पसंद के अस्पताल में इलाज का अधिकार मिले, सरकार स्थिति स्पष्ट करे- पीएमएसएफ

Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक को पसंद के अस्पताल में इलाज का अधिकार मिले, सरकार स्थिति स्पष्ट करे- पीएमएसएफ
सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर सक्रिय सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और उपचार को लेकर जारी विवाद के बीच प्रोग्रेसिव मेडिकोज एंड साइंटिस्ट्स फोरम (पीएमएसएफ) ने मरीजों के अधिकारों और चिकित्सा नैतिकता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि सोनम वांगचुक और उनके परिवार को चिकित्सकीय सलाह के विरुद्ध अस्पताल छोड़ने तथा अपनी पसंद के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज कराने का पूरा अधिकार है। साथ ही फोरम ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि वांगचुक अस्पताल में केवल उपचाराधीन मरीज हैं या फिर किसी कानूनी आधार पर हिरासत में रखे गए हैं।
पीएमएसएफ ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मरीज की स्वायत्तता, गरिमा और निर्णय लेने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। संगठन का मानना है कि इलाज के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मरीज और उसके परिवार के पास होना चाहिए, बशर्ते वे इसके संभावित चिकित्सकीय परिणामों को समझते हों।
पीएमएसएफ के चेयरमैन डॉ. सिद्धार्थ तारा ने कहा कि चिकित्सा का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं है, बल्कि मरीज की इच्छा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना भी चिकित्सा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यदि कोई मरीज किसी अस्पताल में इलाज जारी नहीं रखना चाहता और अपनी इच्छा से दूसरे अस्पताल में उपचार कराना चाहता है तो उसे ऐसा करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
डॉ. तारा ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाने की कार्रवाई एक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई थी, जिसे बाद में चिकित्सा हस्तक्षेप का स्वरूप दिया गया। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार को पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
फोरम ने छात्र कार्यकर्ता नेहा के मामले का भी उल्लेख किया। संगठन का दावा है कि उनकी स्पष्ट असहमति के बावजूद उन्हें हटाने का प्रयास किया गया, जबकि पीएमएसएफ की टीम के अनुसार उस समय उनकी स्थिति चिकित्सकीय आपातकाल जैसी नहीं थी। संगठन ने इसे मरीज की इच्छा और अधिकारों के विरुद्ध बताया।
पीएमएसएफ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि यदि सोनम वांगचुक या उनके परिवार को अस्पताल बदलने की अनुमति नहीं दी जा रही है तो इसके कानूनी और प्रशासनिक कारण सार्वजनिक किए जाएं। संगठन का कहना है कि लोगों को यह जानने का अधिकार है कि वांगचुक अस्पताल में केवल इलाज के लिए भर्ती हैं या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया के तहत वहां मौजूद हैं।
संगठन ने यह भी कहा कि चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। किसी भी मरीज के उपचार से जुड़े निर्णयों में उसके अधिकारों और इच्छाओं का सम्मान होना चाहिए। यदि किसी कारणवश इन अधिकारों पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो उसके पीछे का स्पष्ट कानूनी आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
पीएमएसएफ का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों के अधिकार, चिकित्सा नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार और संबंधित संस्थानों को इस पूरे मामले में स्पष्ट और पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए, ताकि लोगों का चिकित्सा व्यवस्था और प्रशासन पर विश्वास बना रहे।





