sensory garden India: न्यूरो विकार से पीड़ित बच्चों की इंद्रियों को सक्रिय करेगा सेंसरी गार्डन ‘उमंग वाटिका’

sensory garden India: न्यूरो विकार से पीड़ित बच्चों की इंद्रियों को सक्रिय करेगा सेंसरी गार्डन ‘उमंग वाटिका’
नई दिल्ली, 8 जनवरी। सेरेब्रल पाल्सी, ऑटिज्म और एडीएचडी जैसे न्यूरो-डेवलपमेंटल विकारों से जूझ रहे बच्चों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक पहल के तहत सफदरजंग अस्पताल में उत्तर भारत का पहला सेंसरी गार्डन स्थापित किया गया है। ‘उमंग वाटिका’ नामक यह विशेष उद्यान बच्चों की पांचों इंद्रियों को सक्रिय करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिससे उनके संज्ञानात्मक, भावनात्मक और शारीरिक विकास को बढ़ावा मिल सके।
सफदरजंग अस्पताल के बाल न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रचना सहगल ने बताया कि यह गार्डन मानव शरीर की पांच प्रमुख इंद्रियों—देखना, सुनना, सूंघना, स्पर्श करना और गतिशीलता—पर आधारित है। इसका उद्देश्य न्यूरो विकार से पीड़ित बच्चों की सुप्त इंद्रियों को सुरक्षित और आनंददायक वातावरण में जागृत करना है। यह न केवल बच्चों के लिए, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी एक ऐसा स्थान है जहां वे मनोरंजन, विश्राम और आपसी संवाद कर सकें।
डॉ. सहगल के अनुसार, सेंसरी गार्डन की दीवारों पर पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानियों को आकर्षक चित्रों के रूप में उकेरा गया है। इससे बच्चों को खेल-खेल में मनोरंजन के साथ नैतिक शिक्षा भी मिलेगी। इन चित्रों के साथ क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर अभिभावक अपने मोबाइल फोन पर बच्चों को कहानियां सुना सकते हैं, जिससे सुनने और समझने की क्षमता को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
गार्डन का फर्श विशेष प्रकार के सॉफ्ट रबर से तैयार किया गया है ताकि खेलते या दौड़ते समय गिरने की स्थिति में बच्चों को चोट न पहुंचे। यह पूरी व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई है। यह अभिनव पहल ‘आस्था’ द्वारा परिकल्पित की गई है और आर स्क्वायर्ड फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से इसे साकार किया गया। परियोजना के क्रियान्वयन में सीपीडब्ल्यूडी और सफदरजंग अस्पताल की अहम भूमिका रही, जबकि रचनात्मक डिजाइन में किलिकिली संस्था का सहयोग प्राप्त हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘उमंग वाटिका’ समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं, नवाचार और करुणामय उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल न्यूरो विकार से पीड़ित बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करेगी, बल्कि भविष्य में अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए भी एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में सामने आएगी।





