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Stray Dog Attacks: नोएडा में एनिमल एक्टिविस्ट्स का आरोप – रेबीज, पशु क्रूरता और आवारा जानवरों के आंकड़े भ्रामक

Stray Dog Attacks: नोएडा में एनिमल एक्टिविस्ट्स का आरोप – रेबीज, पशु क्रूरता और आवारा जानवरों के आंकड़े भ्रामक

रिपोर्टर: अजित कुमार

नोएडा। भारत में रेबीज संक्रमण, पशु क्रूरता और आवारा जानवरों की संख्या को लेकर गलत और भ्रामक आंकड़े पेश किए जा रहे हैं। यह आरोप शुक्रवार को नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनिमल एक्टिविस्ट्स ने लगाए।

पशु अधिकार कार्यकर्ता और फ़िल्ममेकर संक्षय बब्बर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 7 नवंबर 2025 के अंतरिम आदेश ने अनजाने में एक राष्ट्रीय संकट को जन्म दिया है। उनके अनुसार, “संस्थागत क्षेत्रों” से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी आदेश, पशु जन्म नियंत्रण (एसीबी) नियम, 2023 के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। नियमों के अनुसार, नसबंदी के बाद कुत्तों को उनके मूल क्षेत्र में ही वापस छोड़ा जाना अनिवार्य है।

बब्बर ने आरोप लगाया कि इस आदेश की गलत व्याख्या कर इसे “क्रूरता के लाइसेंस” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका परिणाम यह हुआ कि जानवरों के खिलाफ हिंसा में भयावह वृद्धि हुई है और पशु-विरोधी तत्वों का मनोबल बढ़ा है।

1000 से अधिक अपराधों का दावा

एनिमल एक्टिविस्ट्स के अनुसार, जमीनी स्तर पर कार्यरत संगठनों की साप्ताहिक रिपोर्टों में पशुओं के खिलाफ 1000 से अधिक अपराधों की सूचना मिली है।

  • दिल्ली में एक पिल्ले के पिछले पैर जानबूझकर काटे गए।
  • एक व्यक्ति पर 13 कुत्तों के साथ दुष्कर्म का आरोप।
  • भोपाल में भोजन में विस्फोटक छिपाकर पिल्ले का जबड़ा उड़ाने की घटना।
  • कर्नाटक में एक जनप्रतिनिधि ने कथित रूप से अदालत के आदेश की भावना का हवाला देते हुए 2,800 कुत्तों को ज़हर देने की बात स्वीकार की।

महिला एनिमल फीडर्स पर हमले बढ़े

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि जानवरों को खाना खिलाने वाली महिलाओं पर लगातार हमले बढ़े हैं।

  • दिल्ली के पश्चिम विहार में बुजुर्ग दंपत्ति पर लोहे के पाइप से हमला।
  • ज़ाकिर नगर, दिल्ली में महिला को कुत्तों के लिए ‘बोरी का बिस्तर’ बिछाने पर पीटा गया।
  • गाजियाबाद के ब्रह्मपुत्र एन्क्लेव में महिला फीडर पर हमला, जिसमें उनका हाथ फ्रैक्चर।

देशभर से पशु अधिकार संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्राण एनिमल फाउंडेशन, एसएएस इंडिया, मैत्री भावना फाउंडेशन, अहिंसा फेलो और आसरा के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने अदालत के आदेश के बाद पशुओं के खिलाफ क्रूरता की घटनाओं में वृद्धि की बात कही और चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो इसके गंभीर सामाजिक और मानवीय परिणाम हो सकते हैं।

“अदालत के आदेश की गलत व्याख्या से जानवरों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है। इसे नियंत्रित करना आज हमारी ज़िम्मेदारी है।” – संक्षय बब्बर, एनिमल एक्टिविस्ट

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