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Noida: ऑनलाइन गेमिंग ऐप के नाम पर ठगी करने वाला बड़ा गिरोह बेनकाब, पांच युवतियों सहित आठ आरोपी गिरफ्तार

Noida: ऑनलाइन गेमिंग ऐप के नाम पर ठगी करने वाला बड़ा गिरोह बेनकाब, पांच युवतियों सहित आठ आरोपी गिरफ्तार

नोएडा। ग्रेटर नोएडा की बिसरख थाना पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस कार्रवाई में पांच युवतियों समेत कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 18 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, 155 सिम कार्ड, 55 पेमेंट क्यूआर कोड स्कैनर, 45 हजार रुपये नकद और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। यह गिरोह ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर लोगों को मोटी कमाई का लालच देकर उनके साथ धोखाधड़ी करता था।
बिसरख पुलिस को गोपनीय सूचना मिली थी कि गौर सिटी सेंटर में एक फर्जी कंपनी के नाम पर साइबर ठगी का रैकेट चलाया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने गौर सिटी सेंटर के OC-439 और OC-40 में छापेमारी की, जहां ‘TRENTRAC INNOVATIVE SOLUTIONS’ के नाम से कार्यालय संचालित हो रहा था। मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ‘MAZABOOK MAZE SE JEETO’ नामक ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे।
पुलिस ने इस कार्रवाई में सूरजपुर निवासी गर्व, गाजीपुर निवासी अजय, जबलपुर निवासी दिव्यांग सोनम उर्फ अनिरुद्ध, फिरोजाबाद निवासी रुचि, उत्तराखंड निवासी सुषमा, प्रतापगढ़ निवासी तनीषा और सानिया सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सेंट्रल नोएडा की डीसीपी शक्ति अवस्थी ने बताया कि इस गिरोह का सरगना दिव्यांग सोनल उर्फ अनिरुद्ध है, जो पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह ‘MAZABOOK MAZE SE JEETO’ ऐप के माध्यम से क्रिकेट, कसीनो, एविएटर, रूलेट और नंबरिंग जैसे गेम खिलाने के नाम पर ऑनलाइन सट्टेबाजी करवाता था। गिरोह खासतौर पर उन लोगों को निशाना बनाता था, जिन्हें ऑनलाइन गेम खेलने का शौक होता था। आरोपियों द्वारा युवतियों के माध्यम से लोगों से संपर्क किया जाता था और ज्यादा मुनाफा कमाने का झांसा दिया जाता था।
शुरुआत में पीड़ितों को छोटी रकम जितवाकर उनके खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी, जिससे उनका भरोसा जीत लिया जाता था। जैसे ही निवेश की रकम बढ़ती, आरोपियों द्वारा पैसे ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया जाता था और यह कहकर टाल दिया जाता था कि बड़ी रकम होने पर ही भुगतान संभव है। इसी तरीके से लाखों रुपये की ठगी की गई।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह फर्जी कॉल सेंटर पिछले छह महीनों से गौर सिटी सेंटर में संचालित किया जा रहा था और आरोपी पढ़े-लिखे होने के बावजूद अपराध की राह पर चल रहे थे। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है।

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