PCOD Treatment: होम्योपैथिक इलाज से महिलाओं में पीरियड्स हो रहे रेगुलर, डॉक्टरों ने दी अहम सलाह

PCOD Treatment: होम्योपैथिक इलाज से महिलाओं में पीरियड्स हो रहे रेगुलर, डॉक्टरों ने दी अहम सलाह
नोएडा। बदलती जीवनशैली और गलत खानपान के कारण महिलाओं और किशोरियों में Polycystic Ovary Syndrome (पीसीओडी) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस समस्या के चलते पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और कई मामलों में गर्भधारण में भी दिक्कत आती है। सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की होम्योपैथी ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में ऐसी मरीज पहुंच रही हैं, जिन्हें इस समस्या से राहत मिल रही है।
जिला अस्पताल की सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. तनु त्यागी के अनुसार, अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 120 से 150 मरीज आते हैं, जिनमें से 30 से 50 महिलाएं और किशोरियां पीसीओडी से पीड़ित होती हैं। उन्होंने बताया कि 15 से 55 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं इस समस्या के इलाज के लिए पहुंच रही हैं। मरीजों का कहना है कि होम्योपैथिक दवाओं के सेवन से उनके मिस हुए पीरियड्स धीरे-धीरे नियमित हो रहे हैं।
डॉ. तनु त्यागी ने बताया कि पीसीओडी में शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो जाता है, जिससे मासिक धर्म प्रभावित होता है और गर्भधारण में परेशानी आती है। हालांकि, होम्योपैथी पद्धति में इसका प्रभावी उपचार संभव है, लेकिन इसमें समय लगता है। नियमित दवा और जीवनशैली में सुधार के साथ यह समस्या नियंत्रित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में यह समस्या जेनेटिक भी होती है। यदि परिवार में पहले किसी महिला को पीसीओडी रहा है तो अगली पीढ़ी में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा मोटापा, असंतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी इसके प्रमुख कारण हैं।
वहीं सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोकिता शर्मा का कहना है कि पीसीओडी को एक लाइफस्टाइल डिजीज के रूप में देखा जाना चाहिए। यदि महिलाएं अपनी दिनचर्या और खानपान को संतुलित रखें, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने समय पर सोने-जागने, जंक फूड से परहेज, मोबाइल फोन के सीमित उपयोग और नियमित व्यायाम पर विशेष जोर दिया।
पीसीओडी के सामान्य लक्षणों में मासिक धर्म की अनियमितता, चेहरे और शरीर पर अत्यधिक बाल आना, मुंहासे, मोटापा, गर्भधारण में कठिनाई और पीरियड्स के दौरान अधिक या कम ब्लीडिंग शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय रहते जांच व इलाज कराएं।
बचाव के लिए विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि महिलाएं बाहरी और जंक फूड का सेवन कम करें, रोजाना कम से कम 8 घंटे की नींद लें, शारीरिक रूप से सक्रिय रहें और अपने आहार में हरी सब्जियों व फलों की मात्रा बढ़ाएं। सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।





